President Murmu ने IFS Officers को दिया 'राष्ट्रहित सर्वोपरि' का मंत्र, जनसेवा पर जोर

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 27, 2026

(फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 27 अगस्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के नवनियुक्त अधिकारियों को ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि’ का मंत्र देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया के साथ भारत का जुड़ाव हमेशा देश के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए। आईएफएस के प्रशिक्षु अधिकारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति दुनिया के साथ देश के जुड़ाव के लिए नयी संभावनाएं पैदा कर रही है। उन्होंने राजनयिकों को निवेश, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों के प्रति सतर्क रहने तथा ऐसी साझेदारियां विकसित करने की सलाह दी, जो भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाएं।

राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, मुर्मू ने कहा कि राजनयिकों को अपने संपर्कों को केवल सरकारी कार्यालयों और आधिकारिक बैठकों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें विश्वविद्यालयों, कारोबार जगत, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों, सांस्कृतिक संस्थानों, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों तक भी पहुंच बनानी चाहिए। उन्होंने प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ सार्थक संपर्क कायम करने की सलाह दी, खासकर प्रवासी समुदाय के युवाओं को भारत से जुड़े रहने और देश की विकास यात्रा में योगदान देने के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

कूटनीति के स्वरूप में तेजी से हो रहे बदलाव का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने कहा कि प्रौद्योगिकी देशों के संवाद करने, कारोबार के संचालन और नागरिकों के सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंचने के तरीके को बदल रही है। उन्होंने कहा कि विदेशों में स्थित भारत के मिशनों को भी इस बदलाव के साथ कदमताल करनी होगी। मुर्मू ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बेहतर शासन और गहरे जुड़ाव के साधन के रूप में किया जाना चाहिए, लेकिन इसे कभी भी मानवीय संवेदना का स्थान नहीं लेना चाहिए।’’ राष्ट्रपति ने राजनयिकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि जरूरत के समय भारतीय मिशन हमेशा देश के नागरिकों के लिए सुलभ और उपलब्ध रहें।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर चलाए गए निकासी और मानवीय अभियानों के दौरान प्रदर्शित परंपरा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुर्मू ने कहा, ‘‘मदद मांगने वाले प्रत्येक भारतीय को महसूस होना चाहिए कि उनका मिशन सुलभ, संवेदनशील और भरोसेमंद है।’’ मुर्मू ने कहा कि भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी न केवल हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता वाले देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि वे एक युवा, गतिशील और आकांक्षी भारत का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि शांति, बहुलवाद, संवाद, सह-अस्तित्व और विविधता के प्रति सम्मान भारत की सभ्यतागत सोच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ में गहराई से निहित हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से अनिश्चित और जटिल होती दुनिया में राजनयिकों को चुस्त, जिज्ञासु और लगातार सीखने के लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘सबसे बढ़कर, उन्हें विनम्रता बनाए रखनी चाहिए।’’ मुर्मू ने युवा प्रशिक्षु अधिकारियों से विदेश यात्रा के दौरान हमेशा यह याद रखने का आग्रह किया कि वे केवल भारत सरकार का ही नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और उनकी उम्मीदों तथा आकांक्षाओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। मुर्मू ने अधिकारियों को ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और पेशेवर आचरण के उच्चतम मानदंड बनाए रखने की सलाह दी।

भारतीय विदेश सेवा के 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों और भूटान के दो राजनयिकों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। ये सभी यहां सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में वर्तमान में प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं।

प्रमुख खबरें

Nepal Flood के बाद Glacial Lakes का वैज्ञानिक आकलन जरूरी, शोधकर्ताओं ने जताई चिंता

Sugar Mill Prices में 20% की भारी गिरावट, Retail Market में आम आदमी के लिए जल्द सस्ती होगी चीनी

Digital Arrest का शिकार बना Bhopal का बुजुर्ग दंपति, ठगों ने हड़पे ₹22 लाख

Pralhad Joshi बोले: 500 GW Green Energy लक्ष्य के लिए 30 लाख करोड़ का निवेश जरूरी