भारतीय राजनीति के अजातशत्रु रहे अटल बिहारी वाजपेयी को दी गई श्रद्धांजलि, कभी भूले नहीं जा सकते उनके किस्से

By अनुराग गुप्ता | Aug 16, 2022

पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आज पुण्यतिथि है। ऐसे में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत तमाम नेताओं ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित 'सदैव अटल' जाकर भारतीय राजनीति के 'आजातशत्रु' कहे जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि युग-पुरुष भारत रत्न से विभूषित पूर्व प्रधानमंत्री परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण आदरांजलि। उनसे प्रेरणा प्राप्त करते हुए हम सदैव अटल इरादों और मजबूत संकल्पशक्ति से स्वयं को नए भारत के निर्माण के लिए समर्पित करते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी ने मां भारती के गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए अपने जीवन का प्रत्येक क्षण खपाया। उन्होंने भारतीय राजनीति में गरीब कल्याण व सुशासन के नए युग की शुरुआत की और साथ ही विश्व को भारत के साहस व शक्ति का भी अहसास कराया। आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें नमन।

बहुआयामी और कालजयी महानायक अटल बिहारी वाजपेयी भले ही दैहिक रूप से हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनकी सोच, उनका चिंतन, उनकी कृति और उनके शब्द करोड़ों भारतीयों के लिए आदर्श हैं और उनके किस्से हमारे बीच में अक्सर सुनाई देते हैं। ऐसे में हम आपको उनसे जुड़े हुए एक-दो किस्से सुना देते हैं...

पैदल जाते थे संसद

एक अखबार को दिए इंटरव्यू में अटल बिहारी वाजपेयी के बेहद करीब रहे लालकृष्ण आडवाणी ने एक मजेदार किस्सा बताया था। लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी जब पहली बार सांसद बने थे तो वह भाजपा नेता जगदीश प्रसाद माथुर के साथ चांदनी चौक में रहते थे। दोनों संसद पैदल ही आते जाते थे। लेकिन एक दिन अचानक अटल बिहारी वाजपेयी ने माथुर जी से कहा कि आज रिक्शा से चलते हैं। माथुर जी को थोड़ा आश्चर्य हुआ। लेकिन बाद में पता चला कि आज बतौर सांसद अटल बिहारी वाजपेयी को तनख्वाह मिली थी।

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जब PM उम्मीदवार के तौर पर हुआ ऐलान

तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने 1995 के मुंबई में सार्वजनिक तौर पर यह ऐलान कर दिया था कि अटल बिहारी वाजपेयी ही भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। तब कई लोगों को आश्चर्य भी हुआ था और इसमें खुद अटल बिहारी वाजपेयी भी शामिल थे। ऐसे में उन्होंने तुरंत ही लालकृष्ण आडवाणी से पूछा यह आपने क्या कर दिया ? मुझसे पूछ तो लिया होता। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी को जवाब देते हुए लालकृष्ण आडवाणी ने कहा- पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते मैं अधिकार रखता हूं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक का सफर तय करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर, 1924 को हुआ और उन्होंने 16 अगस्त, 2018 को अपनी कर्मभूमि दिल्ली में आखिरी सांस ली। स्कूली समय से ही भाषण देने के शौकीन रहे अटल बिहारी वाजपेयी के संसद में दिए कई भाषण आज भी चर्चा के केंद्र में बने रहते हैं।

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