RBI पर बढ़ा दबाव! रुपये के 89 पार जाने पर विशेषज्ञों की गहरी चिंता, जानिए बाज़ार का भविष्य

By Ankit Jaiswal | Nov 23, 2025

सुबह बाज़ार खुलते ही निवेशकों के बीच चिंता बढ़ाने वाला रहा. मौजूद जानकारी के अनुसार भारतीय शेयर बाज़ार अभी भी रिकॉर्ड स्तरों के आसपास बने हुए हैं, लेकिन रुपये की तेज़ गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में बढ़ी हलचल ने माहौल को अस्थिर कर दिया है. बता दें कि वैश्विक स्तर पर एआई सेक्टर की तेजी से शुरू हुई ट्रेडिंग गुरुवार को अचानक मंदी में बदल गई, जिसका सीधा असर एशियाई बाज़ारों पर भी दिखा है.

मार्केट विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार रुपये का 89 के स्तर से नीचे जाना बहुत अहम संकेत है, क्योंकि यह एक मनोवैज्ञानिक स्तर माना जाता रहा है और सामान्य तौर पर उम्मीद रहती है कि आरबीआई इस स्तर पर हस्तक्षेप करेगा. गौरतलब है कि रुपये की यह गिरावट एफपीआई की भारी बिकवाली या जापान में बढ़ती मुद्रास्फीति के चलते कैरी ट्रेड के अनवाइंड होने से जुड़ी हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जापान दिसंबर में दरें बढ़ाता है तो कई विदेशी निवेशक अपनी पोज़िशन बदल सकते हैं, जिसका असर भारत जैसे उभरते बाज़ारों पर पड़ता है.

कमज़ोर रुपये के साथ-साथ एफपीआई टैक्सेशन और अस्थिर वैश्विक हालात विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी कम कर रहे हैं. बग्गा का मानना है कि रुपये की इस तेज गिरावट के बाद अब दिसंबर में आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना बेहद कम हो गई है, क्योंकि ऐसा करना रुपये पर और दबाव डाल सकता है. उन्होंने यह भी चेताया कि अगर मुद्रा कमजोर रहती है तो आयातित महंगाई बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता है.

इसके बीच अमेरिका–भारत व्यापार समझौते पर सभी की नज़रें हैं. बग्गा का कहना है कि अगर दोनों देशों के बीच अटके मुद्दों पर सहमति बन जाती है तो भारतीय बाज़ारों में जोरदार रैली देखने को मिल सकती है. बता दें कि भारत ने रूसी तेल खरीद में कटौती की, फिर भी उसे 25% शुल्क का सामना करना पड़ रहा है, जिससे निर्यातकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है. उन्होंने यह भी कहा कि देर से फैसलों की वजह से कई भारतीय उद्योग इस बार क्रिसमस सीज़न का पूरा लाभ नहीं उठा पाए हैं.

बग्गा ने ज़ोर देकर कहा कि भारत को इस समय राजकोषीय प्रोत्साहन की जरूरत है और आरबीआई को आगे चलकर ब्याज दरों में कटौती करनी होगी. उनका कहना है कि कई ऐसे सेक्टर, जो देश में संपत्ति निर्माण करते हैं, अत्यधिक कर भार से जूझ रहे हैं. निजी क्षेत्र के बैंक अभी भी मजबूत स्थिति में हैं और बग्गा इन्हें बाज़ार का एक बड़ा अवसर मानते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि तेज़ी तभी आएगी जब कॉरपोरेट निवेश फिर सक्रिय होगा.

मौजूदा माहौल में विशेषज्ञों की राय है कि बाज़ार आगे भी उतार–चढ़ाव का सामना करेगा और निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए. व्यापक आर्थिक संकेतक और वैश्विक फैसले आने वाले समय की दिशा तय करेंगे, ऐसा कहा जा रहा है कि फिलहाल बाज़ार में सावधानी की जरूरत है और हालात पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए, यही कारण है कि निवेशक स्थिति को समझदारी से आंक रहे हैं.

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