By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 15, 2026
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने शनिवार को भाजपा नेता बी. एल. संतोष के उस दावे को खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि हैदराबाद रियासत के भारत में विलय के दौरान आरएसएस स्वयंसेवकों ने खरगे के परिवार को रजाकारों से बचाया था। प्रियंक ने कहा कि उनके परिवार और क्षेत्र के लोगों की रक्षा सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू और भारतीय सेना ने की थी। प्रियंक की यह टिप्पणी यहां ‘हिंदू जागरण वेदिके’ की ओर से आयोजित ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ कार्यक्रम में संतोष के उस बयान के बाद आई, जिसमें भाजपा नेता ने दावा किया था कि विभाजन के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं ने रजाकारों का सामना किया और हिंदुओं की रक्षा की।
उन्होंने कहा था कि उस समय आरएसएस स्वयंसेवकों ने रजाकारों का मुकाबला किया था। प्रियंका खरगे का जिक्र करते हुए संतोष ने कहा था, ‘‘आपके परिवार को गांव छोड़कर भागना पड़ा था और आपके पिता को केवल अपने पहने हुए कपड़ों के साथ वहां से निकलना पड़ा था।’’ इस दावे को खारिज करते हुए प्रियंक ने कहा, ‘‘आपने (संतोष) दावा किया कि आपने खरगे परिवार की रक्षा की। विभाजन के बाद कई सांप्रदायिक दंगे हुए।
आप किस सांप्रदायिक दंगे में लोगों की रक्षा करने और उनकी मदद करने आए थे?’’ मंत्री ने कहा, ‘‘हां, हमारा परिवार सांप्रदायिक दंगों का शिकार हुआ था। हमें वहां से मजबूर होकर भागना पड़ा और यहां आना पड़ा। उस समय कोई नहीं था, न कोई सरकार थी।
आपने उस समय क्या किया?’’ प्रियंक ने हैदराबाद के भारत में विलय में आरएसएस की भूमिका के दावे पर सवाल उठाते हुए पूछा, ‘‘किसने ‘ऑपरेशन पोलो’ चलाया था? क्या यह आरएसएस ने किया था? इसे सरदार पटेल, नेहरू और भारतीय सेना ने अंजाम दिया था, आरएसएस ने नहीं।’’ ‘ऑपरेशन पोलो’ सितंबर 1948 में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए सैन्य अभियान का कोड नाम था, जिसके परिणामस्वरूप हैदराबाद की रियासत का भारत में विलय हुआ था।
प्रियंक ने यह भी आरोप लगाया कि सांप्रदायिक हिंसा के दौरान लोगों की रक्षा करने के बजाय आरएसएस ने सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘नाथूराम गोडसे, जो सावरकर का अनुयायी था और आरएसएस की विचारधारा से प्रभावित था, जब उसने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या की, उसके बाद कोलकाता और दिल्ली में दंगे हुए।’’ प्रियंक ने कहा, ‘‘आप एक ऐसा संगठन हैं जो सांप्रदायिक दंगे करवाता है, न कि ऐसा संगठन जो सांप्रदायिक दंगे होने पर लोगों की रक्षा के लिए आगे आता है।’’ उन्होंने संतोष द्वारा वी. डी. सावरकर और सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज का जिक्र किए जाने पर भी सवाल उठाया। मंत्री ने दावा किया, ‘‘जब सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद फौज का गठन कर रहे थे और सैनिकों की तलाश कर रहे थे तथा लोगों की भर्ती कर रहे थे, तब सावरकर ने लोगों से आजाद हिंद फौज में शामिल होने के बजाय ब्रिटिश सेना में शामिल होने का आह्वान किया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज हम जो अखंड भारत देख रहे हैं, वह सरदार पटेल के दृढ़ संकल्प के कारण संभव हुआ है।
करीब 560 छोटी रियासतों और राज्यों को एक साथ लाया गया और भारत एक राष्ट्र बना। यह आरएसएस की वजह से नहीं हुआ।’’ संतोष ने आरएसएस के पंजीकरण की प्रियंक खरगे की मांग का विरोध करते हुए संगठन का बचाव किया। भाजपा नेता संतोष ने कहा, ‘‘उस समय भी आरएसएस पंजीकृत नहीं था और आज भी पंजीकृत नहीं है।
पंजीकरण किसी संगठन के अस्तित्व को तय नहीं करता। यह लाखों लोगों के विश्वास के आधार पर काम करने वाला संगठन है।’’ उन्होंने कहा कि विभाजन के समय आरएसएस हिंदुओं के साथ खड़ा था और बिना किसी औपचारिक पंजीकरण के आज भी काम कर रहा है। संतोष ने यह भी कहा कि देश की आजादी केवल नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से नहीं मिली, बल्कि हजारों क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से हासिल हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें आजादी इसलिए मिली क्योंकि लाखों देशभक्त युवक-युवतियों और लाखों सैनिकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर संघर्ष किया।