By राकेश सैन | Jul 30, 2026
कांग्रेस पार्टी की सांसद प्रियंका गांधी की योग्यता का जिक्र करते हुए अकसर राजनीतिक विश्लेषक एक बात का अवश्य जिक्र करते हैं कि उनकी छवि, विशेषकर नाक अपनी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी से मिलती है। लेकिन अब दोनों दादी-पोतियों का एक और समान गुण सामने आया है, इंदिरा गांधी ने 7 नवम्बर, 1966 को संसद भवन के सामने हजारों गोभक्तों पर गोलियां चलवाईं थी और लगभग उसी मानसिकता का परिचय देते हुए अब प्रियंका वाड्रा गांधी ने संसद के भीतर गोमूत्र का उपहास उड़ाया है। शर्मनाक बात है कि जब प्रियंका इस तरह का दुष्कर्म कर रही थी तो विपक्षी बैंचों पर बैठे कांग्रेसी सांसद भी खिलखिला रहे थे। हिन्दू विरोध से उपजी कांग्रेसियों की यह हंसी कौरवसभा में द्रौपदी चीरहरण के समय कपटी दुर्योधन द्वारा लगाए गए अट्टाहस की तरह हर हिन्दू के मनों को बींध गई।
हालांकि चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने किसी का नाम नहीं लिया। लेकिन उनका इशारा आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटि की ओर माना जा रहा है, जो इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली इस टास्क फोर्स का हिस्सा हैं। 2025 में प्रो. कामाकोटि ने दावा किया था कि गोमूत्र में एंटीबैक्टीरियल और पाचन संबंधी गुण होते हैं। प्रो. वी. कामकोटि देश के जाने-माने वैज्ञानिक हैं। जनवरी, 2025 को चेन्नई की एक गौशाला में माटू पोंगल कार्यक्रम में बोलते हुए, कामकोटी ने देशी गाय और जैविक खेती के बारे में कहा। इस दौरान उन्होंने बताया कि गाय के मूत्र में जीवाणुरोधी, कवकरोधी और पाचन सम्बन्धी गुण होते हैं। उन्होंने एक तपस्वी से जुड़ी कहानी भी साझा की, जिन्होंने गौमूत्र पीकर अपना बुखार ठीक कर लिया था। इस ब्यान के कारण उस समय भी प्रो. कामकोटि वामपंथी व जिहादी ताकतों के निशाने पर आ गए थे और प्रियंका ने भी अब उन जख्मों को पुन: कुरेद दिया है।
गोमूत्र का उपहास उड़ाने वालों को जानना चाहिए कि हिन्दू धर्म में कोई भी विश्वास अवैज्ञानिक नहीं हैं, गोमूत्र के औषधीय गुण विज्ञान द्वारा प्रमाणित हैं। भारत के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद और नागपुर के गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के सहयोग से किए गए शोध पर आधारित गोमूत्र के गुणों को अमेरिकी पेटेंट मिल चुका है। गोमूत्र के अर्क पर पहला महत्वपूर्ण अमेरिकी पेटेंट (नंबर 6410059) एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं के असर को बढ़ाने के लिए 2002 में मिला था। इसके बाद कैंसर रोधी दवाओं के प्रभाव को तेज करने और डीएनए सुरक्षा से जुड़े अन्य पेटेंट (पेटेंट नंबर 6896907 और 7718360) भी संयुक्त रूप से भारत के शोधकर्ताओं द्वारा अमेरिका में दर्ज कराए गए। गोमूत्र व अन्य प्राकृतिक चीजों से बने कीटनाशकों को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और पेटेंट प्राप्त हुआ है।
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री श्रीपाद येसो नाइक ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया था कि वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अनुसार, इसकी घटक प्रयोगशाला, केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (सीआईएमएपी), लखनऊ ने नागपुर के गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र के सहयोग से किए गए एक अध्ययन में गाय के मूत्र के आसवन (कामधेनु अर्क) का एक नया उपयोग खोजा है। यह आसवन संक्रमणरोधी और कैंसररोधी एजेंटों सहित जैवसक्रिय अणुओं की सक्रियता बढ़ाने और उपलब्धता को सुगम बनाने में सहायक है। गाय के मूत्र के आसवन में कैंसररोधी प्राकृतिक एजेंट टैक्सोल (पैक्लिटैक्सेल) की जैव-संवर्धन क्षमता पाई गई है, जो यू वृक्ष (टैक्सस एसपीपी.) द्वारा सूक्ष्म मात्रा में उत्पादित होता है। गाय के मूत्र का आसवन, जीवाणुओं पर विभिन्न एंटीबायोटिक दवाओं की निष्फलता क्षमता बढ़ाने के अलावा, स्तन कैंसर कोशिका लाइन एमसीएफ-7 के विरुद्ध पैक्लिटैक्सेल की कोशिका विभाजन अवरोधक गतिविधि को भी बढ़ा सकता है। इसके अलावा, गाय के मूत्र के आसवन से तैयार किए गए एक सफेद क्रिस्टलीय अवक्षेप ने भी गाय के मूत्र के आसवन के समान सक्रियता दिखाई। इस शोध निष्कर्ष पर अमेरिका का पेटेंट भी प्राप्त कर लिया गया है।
लेकिन अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की पराकाष्ठा की सीमा भी लांघ चुकी कांग्रेस पार्टी ने लगता है कि अपनी पुरानी बीमारी के चलते हिन्दू आस्था के साथ-साथ विज्ञान का भी उपहास उड़ाना शुरू कर दिया है।
वैसे प्रियंका के गोमूत्र के उपहास उड़ाने के प्रयास को देख कर किसी को आश्चर्य भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि इनकी दादी पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी गोअष्टमी के दिन 7 नवम्बर, 1966 को संसद भवन के सामने निहत्थे गोभक्तों, संतों व गोमाता पर गोलियां चलवा कर दिल्ली की सडक़ों को रक्तरंजित करने का पराक्रम दिखा चुकी हैं। केरल में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शनकारी सार्वजनिक रूप से एक बछड़े की हत्या कर उसके मांस की दावत उड़ा चुके हैं। अच्छा होगा कि प्रियंका गांधी अपने किए अपराध के लिए समूचे देश से माफी मांगें अन्यथा यह न भूलें कि हिन्दू समाज गोरक्षा व गोसम्मान के लिए 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र क्रान्ति कर चुका है। गोरक्षा व गोसम्मान हिन्दू आस्था से ही नहीं हिन्दू अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न है।
- राकेश सैन
32 खण्डाला फार्म कालोनी,
ग्राम एवं डाकखाना रंधावा मसंदां
जालंधर।