ट्रैफिक साधने के उचित उपाय (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Jun 28, 2023

किसी भी काम को करने के उचित तरीके वही व्यक्ति बता सकता है जिसने वह काम न किया हो। मेरी पत्नी ड्राइव नहीं करती बलिक करवाती है। ट्रैफिक के बीच उन्हें जब जब मेरी ड्राइविंग नहीं जंची, मैंने उनसे गुज़ारिश की कि आप गाइड करें। उन्होंने कार में बैठे बैठे, बाहर तरह तरह की ड्राइविंग शैली का अवलोकन कर ट्रैफिक साधने के कई लाभदायक उपाय सुझाए हैं। वे मानती हैं कि सरकारजी के पास कभी इतना बजट नहीं होगा कि वांछित, ईमानदार ट्रैफिक पुलिसकर्मी हों या हर जगह कंप्युटरीकृत चालान का प्रावधान हो। पत्नी के सुझाए उपाय हैं इसलिए लिखने पड़ेंगे, हो सकता है इनमें से कुछ उपाय सज्जनों को अच्छे न लगें। सबको खुश करना संभव नहीं होता। 

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टू वहीलर पर तीन या ज़्यादा सवारियां लादने को कानूनी वैधता मिले। शहर की अंदरूनी सड़कों व गलियों में हर दस फुट पर स्पीड ब्रेकर हो। सड़कों के खड्डे ठीक न करवाए जाएं क्यूंकि यह ऑटो स्पीड ब्रेकर का काम करते हैं। स्कूटर, बाइक बिना हेलमेट पहने स्टार्ट ही न हो। स्कूल के बच्चों के लिए दो चाबी वाला हेलमेट बने, जिसकी एक चाबी अभिभावकों के पास रहे दूसरी टीचर के पास। हेलमेट घर में पहनकर लॉक कर दें और स्कूल में खुले। सरकार को ड्राइविंग लाइसेंस देने की उम्र बारह साल कर देनी चाहिए। 

उनकी एक मित्र ने उन्हें बताया कि ट्रैफिक कानून में महिलाओं के लिए हेलमेट पहनने का कोई प्रावधान अभी तक नहीं है। पत्नी का सुझाव रहा कि सरकार चाहे तो समाज में बराबरी लाने के लिए पुरुषों के सर से भी हेलमेट हटवा दे या फिर महिलाओं के सर पर भी लगवाना शुरू करे। सभी  गाड़ियों में चार हॉर्न होने चाहिएं। ट्रैफिक जाम की स्थिति में, सड़क पार करने वालों के लिए गाड़ियों के ऊपर से निकलने के लिए तकनीक ईज़ाद की जाए। कार ऐसी हो कि कम चौड़ी सड़क, गली या पैदल चलने वाले देखकर स्वत: स्पीड कम कर ले या बंद हो जाए व जिस जगह पर मोड़ने की अनुमति लिखी हो वहीं मुड़ सके। पूजागृहों के पास भीड़ होना हमारे जैसे देश के लिए स्वाभाविक है इसलिए इन परिसरों को प्रसिद्ध रैस्टौरेंटस की तरह ड्राइव थ्रू बना दिया जाए ताकि भक्तजनों को वाहन से नीचे उतरना ही न पड़े वहीं बैठे बैठे भेंट इत्यादि अर्पण कर सकें व बाहर निकलते हुए प्रसाद ले सकें। 

पत्नी के सुझाव खत्म नहीं हो रहे थे। वैसे बड़े शहरों में, लाल बत्ती पर गाड़ी निकाल लेने की पत्नी सलाह पर मेरा भी कई बार चालान हो चुका है। जब से ट्रैफिक नियम कड़े कर दिए हैं उन्होंने मेरा ज़्यादा ध्यान रखना शुरू कर दिया है। बढ़ती यातायात अराजकता के बीच मैंने भी अधिक संतुलित दिमाग़, टिकी निगाह व सधे हाथों से ड्राइविंग करना शुरू कर दिया है। मेरे बस में सिर्फ इतना ही था। 

- संतोष उत्सुक

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