जनता पूछ रही है- कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के रिश्ते को क्या नाम दें?

By राकेश सैन | Mar 02, 2024

देश में लोकसभा चुनावों की तैयारी को लेकर ‘इंडी’ गठजोड़ के तहत कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबन्धन हो चुका है। देश के अन्य हिस्सों जैसे दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और गोवा में दोनों दल मिल कर चुनाव लड़ेंगे जबकि पंजाब में एक-दूसरे के खिलाफ। इस अजीबो-गरीब गठजोड़ को देख कर हास्य अभिनेता कादर खान की उस फिल्म में कॉमेडी का स्मरण हो आया जिसमें प्रेमी की माँ और प्रेमिका का बाप भी एक दूसरे के चक्कर में पड़ कर शादी कर बैठते हैं। अब इस रिश्ते से प्रेमी अपनी प्रेमिका का भाई हो गया और उसका अपना पिता उसका ससुर भी बन गया। प्रेमिका भी अपनी माँ को सासू कहे या मम्मी, उसे समझ नहीं आ रहा था। परिवार में इन दोनों जोड़ियों के होने वाले बच्चों के सामने समस्या पैदा हो गई कि कौन किसको किस रिश्ते से पुकारे? इसी तर्ज पर उक्त राजनीतिक गठजोड़ को देख कर यह बात सत्य साबित हो गई है कि देश में नई तरह की राजनीति का वायदा करके आए अरविंद केजरीवाल ने वास्तव में नया कर दिखाया है। हालांकि इस तरह के बेमेल गठजोड़ अतीत में भी कुछ स्थानों पर होते रहे हैं परन्तु राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार यह बेर और केर का साथ चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ चले अन्ना हजारे आन्दोलन से उपजी आम आदमी पार्टी अब उसी के पक्ष में दिखाई दे रही है।

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इस बेमेल खिचड़ी गठबन्धन को लेकर एक कहानी सुनाई जाने लगी है कि जैसे बाढ़ के समय जान बचाने के लिए अपनी दुश्मनी भुला कर हर तरह के जीव-जन्तु ऊंचाई वाली जगह पर एकत्रित हो जाते हैं परन्तु पानी उतरते ही उनकी मित्रता उसी बाढ़ के जल में प्रवाहित हो जाती है और फिर एक दूसरे की जान के दुश्मन बन जाते हैं। लगता है कि देश में जिस तरह का राजनीतिक वातावरण बना हुआ है और भाजपा की विजय की अभी से भविष्यवाणी करने वालों की संख्या बढ़ रही है, शायद उसी के भय से आम आदमी पार्टी व कांग्रेस ने मिल कर भानुमती का कुनबा जुटाया है। देश के इतिहास में यह दूसरा चुनाव है जब भ्रष्टाचार को लेकर सरकार हावी है और विपक्षी दल रक्षात्मक मुद्रा में हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर तो काफी समय से इस तरह के केस चले आ रहे हैं परन्तु कट्टर ईमानदार अरविंद केजरीवाल व आप के कई बड़े नेताओं पर भी दिल्ली आबकारी घोटाले के छींटे पड़े हैं जो उन्हें बेचैन किए हुए हैं। आम आदमी पार्टी के कई नेता तो जेलों में कैद हैं और यहां तक कि उन्हें इन केसों में सर्वोच्च न्यायालय से जमानत तक नहीं मिल पा रही। ये वही केजरीवाल हैं जो सोनिया गांधी को मंच पर खड़े हो कर भ्रष्टाचारी बताते थे और दिल्ली की पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री दिवंगत शीला दीक्षित के कथित भ्रष्टाचार के सबूतों का पुलिंदा होने का दावा करते थे। दिल्ली विधानसभा चुनावों में उन्होंने दावा किया था कि सत्ता में आते ही इन सबको जेल की हवा खिलाई जाएगी। पर आज वही केजरीवाल कांग्रेस को परम मित्र बताते नहीं अघाते।

पंजाब में भी भगवंत मान की सरकार ने आते ही कथित भ्रष्टाचार उन्मूलन अभियान चला कर एक दर्जन के करीब पूर्व कांग्रेसी मंत्रियों व विधायकों के यहां सतर्कता विभाग की छापामारी करवाई और कईयों को जेल में भेजा परन्तु वर्तमान में न जाने किस कारण से उनका यह अभियान केवल पटवारियों और कलर्कों तक सीमित हो कर रह गया। बड़े नेताओं के केस लम्बी तारीख पर डाल दिए गए हैं। पंजाब के बड़े कांग्रेसियों के भ्रष्टाचार पर न केवल भगवंत मान बल्कि उनके मंत्रियों व नेताओं तक ने बोलना कम कर दिया।

जैसे कि बताया जा चुका है कि विरोधी दलों से गठजोड़ होना कोई नई बात नहीं है परंतु किसी दो दलों में एक स्थान पर तो गठबंधन हो और दूसरी जगह पर एक-दूसरे से भिड़ते दिखें तो अतीत में ऐसा राजनीतिक उदाहरण दुर्लभ ही है। कहने को दोनों दल दावा करते हैं कि वे देश में लोकतंत्र व संविधान बचाने के लिए एक दूसरे के साथ आए हैं अगर ऐसा है तो इतने पवित्र यज्ञ में पंजाब को क्यों आहूति डालने से वंचित कर दिया ? देशवासी अब आम आदमी पार्टी व कांग्रेस दोनों से पूछ रहे हैं कि इस रिश्ते को क्या नाम दें ?

-राकेश सैन

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