पंजाब विधानसभा चुनाव: बेरोजगारी, बेदअबी मामले, मादक पदार्थ से जुड़ा खतरा प्रमुख मुद्दे

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 09, 2022

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव में बेरोजगारी, बेअदबी से जुड़े मामलों में न्याय, अवैध रेत खनन और मादक पदार्थ से जुड़ा खतरा प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं। आम आदमी पार्टी (आप) एक तरफ जहां कड़ी टक्कर देने की जुगत में है वहीं, कई किसान संगठनों के चुनावी मैदान में ताल ठोंकने के बीच राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस संगठन में एकजुटता बनाए रखने में जुटी है। उधर, कृषि कानूनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाता तोड़ने के बाद शिरोमणि अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन किया है। भाजपा ने सुखदेव सिंह ढींढसा नीत शिअद (संयुक्त) और पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है। पंजाब में 14 फरवरी को मतदान होगा और मतगणना 10 मार्च को होगी। राज्य में विपक्षी दल पिछले चुनावी वादों को लेकर राज्य सरकार की आलोचना करने के साथ ही बेरोजगारी के मुद्दे पर लगातार उस पर निशाना साधते रहे हैं। विभिन्न विभागों में संविदा और अस्थायी कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित नहीं करने के लिए राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस को आलोचना का सामना करना पड़ा है। 

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वहीं, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने 36,000 संविदा कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के विधेयक को मंजूरी नहीं देने को लेकर राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के खिलाफ धरना देने की धमकी भी दी है। गुरु ग्रंथ साहिब की कथित बेअदबी और इसका विरोध करने वालों पर पुलिस की गोलीबारी से जुड़े मामलों में न्याय दिलाना भी विधानसभा चुनाव में एक और मुद्दा है। कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू इन मामलों में न्याय की मांग करते रहे हैं और उन्होंने इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ लगातार मोर्चा खोला हुआ था। मादक पदार्थों का खतरा, अवैध रेत खनन और राज्य का बढ़ता कर्ज अन्य ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं जिनकी गूंज चुनाव प्रचार में सुनायी दे रही है। शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया पर हाल ही में मादक पदार्थ से जुड़े मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, उन्हें अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। मजीठिया की गिरफ्तारी को लेकर आप ने राज्य सरकार की आलोचना की है। पंजाब के चुनावी परिदृश्य में कई दावेदारों की मौजूदगी से मामूली अंतर भी उम्मीदवारों की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। किसी भी पार्टी के पक्ष में लहर नहीं होने के कारण सभी राजनीतिक दल पंजाब में अगली सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि आम आदमी पार्टी आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद के लिए अपना चेहरा घोषित कर सकती है जबकि इस पद के लिए कांग्रेस की तरफ से किसी चेहरे को पेश करने की संभावना नहीं है।

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