Punjab में नशा बना चुनावी मुद्दा, विपक्ष के हमलों पर AAP ने गिनाईं 80000 गिरफ्तारियां

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 06, 2026

चंडीगढ़, छह अक्टूबर पंजाब विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने शेष हैं और इस बीच नशे की समस्या एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गई है। विपक्षी दलों ने नशे की समस्या को खत्म करने में कथित तौर पर विफल रहने को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर हमला बोला है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने हालांकि, अपने नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ को रेखांकित करते हुए दावा किया कि इसके तहत नशा तस्करी में शामिल करीब 80,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया और बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए।

हालांकि, राज्य की पूर्ववर्ती सरकारें लोगों को नशे की समस्या से मुक्ति दिलाने का वादा करती रही हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया पर प्रसारित नशे के आदी लोगों के वीडियो और कथित तौर पर नशे की अधिक मात्रा लेने से हुई मौतों की तस्वीरों का हवाला देते हुए इस मुद्दे को एक बार फिर प्रमुखता से उठाने की कोशिश की है, ताकि संकट की गंभीरता को रेखांकित किया जा सके। विपक्षी दल भगवंत मान सरकार को नशे की समस्या को लेकर घेर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि सरकार इसे रोकने में ‘पूरी तरह विफल’ रही है।

पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नशे की समस्या को अपने चुनाव अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाया है। पार्टी ने अपनी 13 दिवसीय ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ निकाली, जो 117 विधानसभा क्षेत्रों से होकर करीब 4,000 किलोमीटर चली।

भाजपा का शीर्ष नेतृत्व राज्य की सभी 117 विधानसभा सीट पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। यात्रा के दौरान पार्टी नेताओं ने नशे से प्रभावित परिवारों से भी बातचीत की। इनमें से कई परिवारों ने अपने बेटों और पतियों के ‘चिट्टा’ की गिरफ्त में आने की बात कही।

‘चिट्टा’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर सिंथेटिक नशीले पदार्थों के लिए किया जाता है। कई परिवारों ने दावा किया कि उनके इलाकों में ‘चिट्टा’ खुलेआम उपलब्ध है और इसकी बिक्री रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। इस अभियान के राजनीतिक महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 18 सितंबर को पठानकोट में इसकी शुरुआत की थी, जबकि 30 सितंबर को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली के साथ इसका समापन हुआ।

शाह ने दावा किया कि आप सरकार के ‘‘खराब शासन’’ के कारण पंजाब नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता में आती है तो उनकी पार्टी 31 दिसंबर, 2029 तक पंजाब को ‘चिट्टा’ मुक्त कर देगी। उन्होंने कहा था कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव केवल ‘नशा मुक्त पंजाब’ के मुद्दे पर लड़ेगी।

भाजपा की नशा विरोधी यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नशे की समस्या को लेकर पंजाब को ‘बदनाम’ करने का आरोप लगाया और भाजपा से गुजरात तथा अन्य भाजपा शासित राज्यों में नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाने को कहा। अकाली दल, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए मान ने कहा कि अतीत में आपराधिक तत्वों को ‘संरक्षण’ देने वालों को सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। मान ने साथ ही नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की सराहना की।

उन्होंने नशे को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस में 10,000 नयी भर्तियों की घोषणा भी की और कहा कि राज्य ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ की अंतिम और निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। पुलिस के अनुसार, इस अभियान के तहत 60,000 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गईं और करीब 80,000 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने तीन हजार 800 किलोग्राम से अधिक हेरोइन के अलावा अफीम, चूरा पोस्त और गांजा भी बरामद किया।

कांग्रेस ने नशे की समस्या को लेकर केंद्र और आप सरकार दोनों से सवाल किया है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि नशे की समस्या को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या एक गंभीर मुद्दा है।

रंधावा ने कहा कि इसे राजनीतिक रंग देने के बजाय केंद्र और पंजाब सरकार को मिलकर काम करना चाहिए तथा इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। शिरोमणि अकाली दल की नेता और बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने ‘मावां-धीयां इंसाफ यात्रा’ शुरू की। उन्होंने कहा कि पंजाब की माताएं और बेटियां अब नशे के खिलाफ लड़ने और अपने बच्चों को इस अभिशाप से बचाने में विफल आम आदमी पार्टी (आप) को सत्ता से हटाने के लिए एकजुट हो गई हैं।

खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले अकाली दल वारिस पंजाब दे ने भी दावा किया कि केवल वही पंजाब से नशे की समस्या को खत्म कर सकता है। पार्टी ने कहा कि राज्य की कोई भी सरकार अब तक नशे को खत्म नहीं कर पाई है।

प्रमुख खबरें

Aviation Turbine Fuel की महंगाई रोकने को Price Stabilisation Fund पर केंद्र कर रहा विचार

The Batman Part II की शूटिंग फिर अटकी: डायरेक्टर मैट रीव्स ने अचानक लिया ब्रेक, जानें क्या है वजह

Australia के खिलाफ Durban Test में Kagiso Rabada खेलेंगे या नहीं, आखिरी पलों में होगा फैसला

Indore में आरई-2 सड़क से अतिक्रमण हटाने गई टीम पर पथराव, 8 गिरफ्तार