By अंकित सिंह | Oct 13, 2026
2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों में चार महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में कांग्रेस आलाकमान 'जेन-ज़ी' (Gen Z) पर केंद्रित एक कैंपेन की योजना बना रहा है। इसका मकसद बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और AAP के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से लोगों की नाराज़गी का फ़ायदा उठाना है। पार्टी पंजाब को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानती है।
पार्टी ने चुनाव रणनीतिकार सुनील कानूगोलू की टीम को कैंपेन की योजना बनाने का काम सौंपा है। पार्टी के एक नेता ने बताया कि टीम पहले ही पंजाब में तैनात हो चुकी है और उसने काम शुरू कर दिया है। पिछली बार के चुनावों के उलट, इस बार पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों और कैंपेन की रणनीति में तालमेल बिठाने में हाईकमान और टॉप लीडरशिप की अहम भूमिका होने की उम्मीद है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) कैंपेन की रूपरेखा तैयार करेगी और राज्य के नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपेगी।
इस मामले की जानकारी रखने वाले पार्टी के एक नेता ने कहा कि हाईकमान उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने और फाइनल करने के लिए अपने सर्वे भी कराएगा। पार्टी हाईकमान यह रणनीति इसलिए अपना रहा है क्योंकि राज्य इकाई में गुटीय खींचतान बनी हुई है। इसी वजह से ओलंपियन परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है, जिन्होंने लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की जगह ली है। राजा वडिंग उन पार्टी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं जिन्हें वे अपने पद से हटाए जाने के लिए जिम्मेदार मानते हैं। पार्टी झगड़ालू नेताओं को एक मंच पर लाना चाहती है क्योंकि वह 2012 के विधानसभा चुनावों में हुई गलतियों को दोहराना नहीं चाहती, जब राज्य के नेतृत्व पर भरोसा करने के कारण उसे हार का सामना करना पड़ा था; इसलिए वह सावधानी से आगे बढ़ना चाहती है।