By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 27, 2026
पंजाब में तीन लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों ने लंबित महंगाई भत्ते (डीए) को जारी करने सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को राज्यव्यापी हड़ताल की जिसके कारण विभिन्न सरकारी विभागों का कामकाज प्रभावित हुआ और अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) की सेवाएं भी बाधित रहीं। मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच जालंधर में प्रस्तावित बैठक उस समय रद्द कर दी गई, जब मान ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को स्पष्ट किया कि बातचीत तभी होगी, जब वे हड़ताल खत्म कर देंगे। कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया और बिना किसी शर्त के बैठक किए जाने पर जोर दिया।
कई कर्मचारियों ने आकस्मिक अवकाश ले लिया। सरकारी कर्मचारियों की यह हड़ताल सरकार के खिलाफ सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक मानी जा रही है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने जिला मुख्यालयों और अन्य जगहों पर भी धरना-प्रदर्शन किया और भगवंत मान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
राज्य सरकार के ‘आम आदमी क्लीनिक’ फिरोजपुर में बंद रहे। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रहीं, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। होशियारपुर में पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (पीसीएमएसए) ने विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए सिविल अस्पताल होशियारपुर और जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाओं का बहिष्कार किया।
पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति पंजाब के संयोजक और सरकारी शिक्षक संघ पंजाब के सचिव जसवीर सिंह तलवाड़ा ने बताया कि पंजाब के होशियारपुर जिले में सरकारी स्कूल बंद रहे तथा शिक्षकों और लिपिकीय कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से आकस्मिक अवकाश लिया। सरकारी कॉलेज प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष अमृत समरा ने बताया कि सरकारी कॉलेज, होशियारपुर में भी छात्रों की उपस्थिति कम रही, क्योंकि लगभग सभी नियमित शिक्षक और लिपिकीय कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से आकस्मिक अवकाश लिया। अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में चिकित्सकों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया।
अस्पताल में प्रदर्शन कर रहे एक चिकित्सक ने बताया कि ओपीडी सेवाएं बंद रहीं लेकिन आपातकालीन सेवाएं चालू रहीं। होशियारपुर में उपायुक्त कार्यालय, एसडीएम और तहसील कार्यालय, शिक्षा विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), बागवानी विभाग, कृषि विभाग, सिविल सर्जन कार्यालय, जिला उद्योग केंद्र, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, आबकारी विभाग और कोषागार विभाग समेत कई अन्य विभागों के कर्मचारियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। ‘रिटायर्ड पेंशनर्स यूनियन’ के सदस्य रविंदर लूथरा ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) ने चुनाव से पहले कई वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद वह उन्हें पूरा करने में ‘‘विफल’’ रही।
इसी तरह के प्रदर्शन लुधियाना, फगवाड़ा और जालंधर समेत राज्य के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिले। हड़ताल के दौरान सरकारी बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं। मान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कर्मचारी हमारे परिवार का अहम हिस्सा हैं और उनकी हर जायज मांग सुनने के लिए हम तैयार हैं लेकिन बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकतीं।
सरकार हर समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन बातचीत तभी होगी, जब हड़ताल खत्म की जाएगी।’’ मान ने यह भी दावा किया कि पंजाब सरकार के कर्मचारियों को देश के सभी सरकारी कर्मचारियों की तुलना में सबसे अधिक वेतन मिलता है। मान ने जालंधर में कहा, “अगर केंद्र सरकार किसी कर्मचारी को 30,000 से 32,000 रुपये देती है तो पंजाब सरकार 50,000 रुपये देती है। यह बेहद गर्व और संतोष की बात है कि राज्य सरकार अपने उन कर्मचारियों को सबसे अधिक वेतन देती है, जो उसकी रीढ़ हैं।’’ पंजाब सरकार ने बाद में उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी, जो ड्यूटी से अनुपस्थित रहे।
कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची तैयार कर सामान्य प्रशासन विभाग को कार्यदिवस समाप्त होने तक भेजने को कहा, ताकि लागू सेवा नियमों के प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा सके। इस बीच, पंजाब में विपक्षी दलों ने सरकारी कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल को लेकर ‘आप’ सरकार पर निशाना साधा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद तरुण चुग ने भगवंत मान सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की व्यापक ‘महा हड़ताल’ ‘आप’ सरकार के ‘‘वित्तीय कुप्रबंधन और उसकी प्रशासनिक विफलता’’ को सीधे तौर पर दर्शाती है।
चुग ने कहा कि ‘आप’ सरकार कहती है कि उसके पास कर्मचारियों का वैध बकाया चुकाने के लिए संसाधन नहीं हैं, लेकिन प्रचार, विज्ञापनों और अन्य गैर-जरूरी खर्चों के लिए उसे धन की कमी नहीं होती। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी ‘आप’ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कर्मचारी अपनी मेहनत की जायज कमाई मांग रहे हैं, वे पैसे की भीख नहीं मांग रहे। मजीठिया ने इसे पंजाब के इतिहास की ‘‘सबसे बड़ी’’ हड़ताल करार देते हुए कहा, ‘‘यह केवल हड़ताल नहीं है।
यह इस अहंकारी सरकार के खिलाफ पंजाब का फैसला है। आज पंजाब का हर वर्ग, हर दुकानदार, किसान और मजदूर कर्मचारियों के साथ खड़ा है।’’ कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने लंबित महंगाई भत्ते के भुगतान की मांग कर रहे कर्मचारियों के प्रति मुख्यमंत्री के कथित टकराव वाले रवैये की निंदा की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘पंजाब के सरकारी कर्मचारियों की आज की ‘महा हड़ताल’ इस बात की याद दिलाती है कि आप सरकार ने उन लोगों के साथ किस तरह विश्वासघात किया है जिन्होंने कभी फूलों से उसका स्वागत किया था।
आज इन कर्मचारियों को अपने वैध अधिकार हासिल करने के लिए सड़कों पर उतरने और अदालतों का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लंबित महंगाई भत्ते का बकाया जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने और कर्मचारियों को नियमित करने की उनकी मांगें जायज हैं।’’ पंजाब सांझा मुलाजिम मंच के नेता सुखचैन सिंह खैरा ने कहा कि सरकारी कर्मचारी किसी कार्रवाई से डरते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी शुक्रवार और शनिवार को मुख्यमंत्री के पुतले फूंकेंगे।
खैरा ने कहा कि आगे की रणनीति तय करने के लिए रविवार को लुधियाना में सभी कर्मचारी संगठनों की बैठक होगी। प्रदर्शनकारी कर्मचारी लंबित 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) जारी करने, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग कर रहे हैं।