PV Narasimha Rao Death Anniversary: देश के 9वें PM पीवी नरसिम्हा राव थे राजनीति के 'आधुनिक चाणक्य', जानिए कांग्रेस से उनके बिगड़े रिश्ते का सच

By अनन्या मिश्रा | Dec 23, 2024

आज ही के दिन यानी की 23 दिसंबर को भारत के 9वें प्रधानमंत्री रहे पीवी नरसिम्‍हा राव का निधन हो गया था। उनका पूरा नाम पामुलापार्ती वेंकट नरसिम्‍हा राव था। नरसिम्हा राव को राजनीति के अलावा संगीत, साहित्य, कला और विभिन्न क्षेत्रों में माहिर थे। वह भाषाओं में अधिक रुचि रखते थे। वहीं अपने बोलचाल में विभिन्न भाषाओं का प्रयोग करते थे। उनका व्यक्तित्व बेहद शानदार था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर भारत के 9वें प्रधानमंत्री रहे पीवी नरसिम्‍हा राव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

आंध्र प्रदेश के करीमनगर जिले में स्थित भीमाडेवरल्ली मंडल गांव में 28 जून 1921 को पीवी नरसिम्‍हा राव का जन्म हुआ था। वर्तमान समय में यह तेलंगाना राज्य का हिस्सा है। उन्होंने छात्र नेता के तौर पर राजनीति की शुरूआत की थी। पी वी नरसिम्हा राव ने आंध्र प्रदेश के विभिन्न इलाकों में सत्याग्रही आंदोलन का नेतृत्व किया था। साल 1930 के दशक में हैदराबाद में हुए वंदे मातरम आंदोलन के भी सक्रिय भागीदार रहे

भारत के पहले दक्षिण भारतीय प्रधानमंत्री

भले ही पी वी नरसिम्हा राव की मातृभाषा तेलगु थी। लेकिन फिर भी राव 6 विदेशी भाषाओं के अलावा 9 भारतीय भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखते थे। देश की स्वतंत्रता के बाद राव भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े। साल 1971 से लेकर 1973 तक राव आंध्र प्रदेश के सीएम रहे। फिर वह इंदिरा गांधी और राजीव गांधी दोनों की सरकारों में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल रहे। पी वी नरसिम्हा राव के अनुभव, शांत स्वभाव और विद्वता के कारण वह साल 1991 में पहले दक्षिण भारतीय प्रधानमंत्री बनें।

सोनिया और राव के बिगड़े रिश्ते

शुरूआत में सोनिया गांधी और राव की बहुत अच्छी बनती थी। हर मामले में सोनिया गांधी राव की सलाह लेती थीं। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि राव ने सोनिया गांधी का भरोसा खो दिया। दरअसल, तिरुपति में साल 1992 में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ। जिसके बाद कांग्रेस के कुछ नेता पी नरसिम्हा राव की शिकायतें लेकर सोनिया से मिलने लगे। लेकिन इन शिकायतों का कुछ खास असर नहीं हुआ।

फिर 06 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई और इसके बाद सोनिया गांधी का पहला सियासी बयान सबके सामने आया। हालांकि इसके बाद भी राव सोनिया गांधी से हर हफ्ते मिलते रहे। वहीं विपक्ष बार-बार सवाल उठाता रहा कि आखिर देश के पीएम को एक आम नागरिक रिपोर्ट करने की जरूरत क्या है। आखिरकार साल 1993 में राव ने सोनिया गांधी के घर 10 जनपथ जाना छोड़ दिया। वहीं विरोधियों को सोनिया गांधी के कान भरने का मौका मिल गया।

वहीं 20 अगस्त 1995 को अमेठी की जनसभा में सोनिया गांधी ने अपने भाषण में कहा कि उनके पति राजीव गांधी को गुजरे कई दिन हो गए। लेकिन अभी भी मामला धीमी गति से चल रहा है। सोनिया का इशारा राव सरकार की ओर था। उनके इस बयान से भीड़ में 'राव हटाओ, सोनिया लाओ' के नारे गूंजने लगे। फिर साल 1998 में कांग्रेस की कमान खुद सोनिया गांधी ने संभाल ली और साल 1999 के चुनाव में राव को टिकट भी नहीं मिला था।

मृत्यु

बता दें कि 23 दिसंबर 2004 को देश के 9वें प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की मृत्यु हो गई। लेकिन उनका शव न तो कांग्रेस मुख्यालय में रखा गया और न ही दिल्ली में उनका अंतिम संस्कार होने दिया गया। ऐसे में कांग्रेस के अंदर और पार्टी के बाहर के लोग भी यही मानते थे कि इस फैसले के पीछे सोनिया गांधी जिम्मेदार थीं।

प्रमुख खबरें

जमीन बेचकर बेटे को बनाया Cricketer, Bihar के Vaibhav Suryavanshi की Team India तक की संघर्ष गाथा

World Cup 2026 पर विवादों का साया, अब Lionel Messi की Private जानकारी लीक होने से मचा हड़कंप

Mohammed Siraj को क्यों दिया गया आराम, आंकड़ों ने बताई भारतीय टीम की बड़ी रणनीति

USA ने तोड़ा FIFA World Cup का सपना, घर लौटे Omar Artan का हुआ हीरो जैसा ग्रैंड वेलकम