By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 27, 2026
पी वी सिंधू और उन्नति हुड्डा साहसिक प्रदर्शन के बावजूद एशियाई खेल महिला एकल क्वार्टर फाइनल में हार गई जिससे इन खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत की झोली खाली रही। भारत ने हांगझोउ में पिछली बार खेलों में तीन पदक जीते थे जिसमें पुरूष टीम ने रजत, सात्विक साइराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने पुरूष युगल में स्वर्ण और एच एस प्रणय ने पुरूष एकल में कांस्य पदक अपने नाम किया था। तीन साल बाद भारतीय पुरूष टीम ने कांस्य पदक जीता लेकिन कोई भी भारतीय खिलाड़ी विभिन्न वर्गों में सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका।
उन्होंने कहा ,‘‘ यह दुखद है लेकिन इससे उबरना होगा। सेमीफाइनल में पहुंचना अच्छा रहता लेकिन यह सब होता रहता है। मजबूती से वापसी करना अहम है।’’ उन्नीस वर्ष की हुड्डा को तीन बार की विश्व चैम्पियन जापान की अकाने यामागुची ने 21 . 16, 14 . 21, 21 . 17 से हराया। इससे पहले त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी महिला युगल क्वार्टर फाइनल में दुनिया की पांचवें नंबर की मलेशियाई जोड़ी पीयरली तान और तिनाह मुरलीधरन से सीधे गेम में हारकर बाहर हो गई। पिछले महीने दिल्ली में विश्व चैम्पियनशिप में पहली बार कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय जोड़ी को विश्व चैम्पियनशिप 2025 की रजत पदक विजेता जोड़ी से 18 . 21, 9 . 21 से पराजय का सामना करना पड़ा।
वहीं मिश्रित युगल में ध्रुव कपिला और तनीषा क्रास्टो को दुनिया की नंबर एक जोड़ी चीन की फेंग यान झि और हुआंग डोंगपिंग ने 21 . 14, 18 . 21, 21 . 18 से हराया। तनीषा ने मैच के बाद कहा ,‘‘यह निराशाजनक है कि हम पदक नहीं जीत सके लेकिन हमें अपने प्रयास पर गर्व है। हमने अंत तक जुझारूपन दिखाया।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ एशियाई खेलों से बहुत कुछ सीखा। हमने अच्छा बैडमिंटन खेला और चीन के खिलाफ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। हमने अपने खेल में काफी सुधार किया है। जीत की भूख काफी है और आत्मविश्वास बढा है।’’ ध्रुव ने कहा ,‘‘ हमने दूसरे गेम में उन पर काफी दबाव बनाया। तीसरे गेम में अंतर काफी था लेकिन हम करीब पहुंचे हालांकि बेहतर कर सकते थे। हम अब ब्रेक लेकर आगे के बारे में सोचेंगे।’’
सिंधू का चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ इस मैच से पहले 7 . 9 का रिकॉर्ड था। उन्होंने जुलाई में जापान ओपन सुपर 750 खिताब जीतने के सफर में उसे हराया था। सिंधू 24 घंटे के भीतर तीसरा मैच खेल रही थी लेकिन शुरूआत में ही दबाव बना लिया। उन्होंने पहले गेम में 7 . 2 के बाद 11 . 8 की बढत बनाई। इसके बाद 21 . 11 से पहला गेम जीता। चेन ने हालांकि दमदार वापसी करते हुए 9 . 5 की बढत बनाई लेकिन सिंधू ने स्कोर 9 . 9 कर दिया। एक समय स्कोर 16 . 18 था लेकिन चेन ने दो गेम प्वाइंट और यह गेम जीतकर मुकाबले को निर्णायक गेम तक खींचा। तीसरे गेम में शुरू ही में चेन ने बढत बना ली और सिंधू वापसी नहीं कर सकी।
दूसरे मुकाबले में दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी यामागुची के स्ट्रोक्स में विविधता थी और उन्होंने काफी आक्रामक खेल दिखाया। ब्रेक के समय उनके पास 11 . 4 की बढत थी। उन्नति ने आक्रामक स्ट्रोक्स और स्मैश से वापसी की कोशिश की लेकिन 14 . 8 से आगे चल रही यामागुची ने लंबी रेली के बाद ड्रॉप शाट लगाया और चार गेम प्वाइंट बनाकर पहले को भुनाते हुए शुरूआती गेम जीत लिया। दूसरे गेम में उन्नति ने वापसी की और अच्छी रेलियां लगाते हुए जीत दर्ज करके मुकाबले को तीसरे गेम में पहुंचा दिया जिसमें यामागुची विजयी रही। वहीं त्रिसा और गायत्री अच्छे फॉर्म के साथ इन खेलों में आई थी और दुनिया की तीसरे नंबर की जोड़ी जापान की युकी फुकुशिमा और मायु मत्सुमोतो को हराया था।
मलेशिया की आक्रामक जोड़ी के खिलाफ अब तक आठ में से वह छह मुकाबले हार चुके थे। शुरूआत में ही भारतीय जोड़ी 3 . 8 से पिछड़ गई लेकिन वापसी करते हुए स्कोर 10 . 10 किया। त्रिसा और गायत्री ने भी आक्रामक खेल दिखाते हुए हर शॉट का बराबरी से जवाब दिया और स्कोर 14.14 कर लिया। कुछ गलतियों के कारण हालांकि वे 14 . 17 से पीछे हो गए।
मलेशियाई जोड़ी का एक शॉट बाहर जाने से भारतीय जोड़ी वापसी करती हुई दिखी लेकिन फिर पीयरली और तिनाह ने 19 . 16 से बढत बना ली। त्रिसा की शटल नेट में जाने से उन्हें चार गेम प्वाइंट मिले। भारतीय जोड़ी ने दो बचा लिये लेकिन एक स्मैश के साथ मलेशियाई जोड़ी ने गेम जीत लिया। दूसरे गेम में भारतीय जोड़ी 3 . 0 से आगे थे लेकिन उनकी गलतियों का फायदा उठाते हुए मलेशियाई जोड़ी ने 7 . 3 से बढत बनाई। इसके बाद भारतीय जोड़ी 4 . 11 से पीछे हो गई। भारतीयों की गलतियों का सिलसिला जारी रहा और मलेशियाई खिलाड़ियों ने 12 मैच प्वाइंट बना लिये। इसके बाद त्रिसा और गायत्री के लिये वापसी असंभव हो गई।