Radha Ashtami 2025: 31 अगस्त को मनाई जायेगी राधा अष्टमी, इन उपायों के करने से जीवन में बनी रहती है सुख-समृद्धि

By डा. अनीष व्यास | Aug 29, 2025

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री राधा रानी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। राधा अष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पावन और श्रद्धा से भरा हुआ दिन माना जाता है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि राधा अष्टमी का पर्व इस वर्ष 31 अगस्त को मनाया जाएगा। तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को रात 10:46 मिनट पर होगी और समापन 31 अगस्त को रात 12:57 मिनट पर होगा। राधा अष्टमी पर विशेषकर बरसाना और मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में भव्य आयोजन होते हैं। भक्तजन इस दिन राधा-कृष्ण की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, कीर्तन-भजन करते हैं और राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से जीवन में प्रेम, सौहार्द और सुख-शांति का वास होता है।

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राधा अष्टमी तिथि 

अष्टमी तिथि आरंभ: 30 अगस्त, रात्रि 10:46 बजे से 

अष्टमी तिथि समाप्त: 31 अगस्त, देर रात 12:57 बजे तक  

उदयातिथि के अनुसार राधा अष्टमी 31 अगस्त को मनाई जाएगी। 

राधा अष्टमी शुभ मुहूर्त 

पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 31 अगस्त, प्रातः 11:05 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक रहेगा

राधा अष्टमी पर करने योग्य उपाय

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस दिन सुबह स्नान करके राधा-कृष्ण की पूजा करें। कथा और मंत्रजप के साथ गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा धन का दान करें। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है।

शीघ्र विवाह के लिए जपें ये मंत्र

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अगर विवाह में बाधा आ रही हो, तो राधा अष्टमी के दिन 'ॐ ह्रीं श्री राधिकायै नमः' मंत्र का जप करना विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे विवाह में आ रही रुकावटें समाप्त होती हैं और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है। वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए इस दिन राधा-कृष्ण की उपासना कर प्रभु को गुलाब, मोरपंख और बांसुरी अर्पित करें। यह उपाय पति-पत्नी के रिश्तों में प्रेम और मधुरता बढ़ाने वाला माना जाता है।

राधा अष्टमी के दिन क्या करें

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर शुद्ध जल से स्नान करें। स्नान के बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें ताकि मन और शरीर दोनों पवित्र रहें। तभी व्रत और पूजा का संकल्प लें। पूरे दिन ब्रह्मचर्य नियम का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। इसका मतलब है कि आप न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी संयमित और शुद्ध रहें। इस दिन राधा रानी को केवल ताजी और पवित्र चीज़ें जैसे ताजे फल, दूध, दूध से बने प्रसाद, फूल, इत्यादि ही भोग के रूप में लगाएं। पुरानी या अर्धपकी हुई चीज़ें अर्पित न करें। पूजा के बाद राधा अष्टमी व्रत की कथा का पाठ या श्रवण करें। इससे व्रत की महिमा और धार्मिकता बढ़ती है और मन को आध्यात्मिक शांति मिलती है। व्रत खोलने का समय खास होता है। शुभ मुहूर्त में ही व्रत का पारण करना चाहिए ताकि पूजा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो। जल्दबाजी न करें और समय का सम्मान करें। व्रत खोलते समय उसी प्रसाद को ग्रहण करें, जिसे पूजा में राधा रानी को भोग लगाया गया था। इससे पूजन की पूर्णता बनी रहती है। व्रत खोलने से पहले जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, या धन दान करें। इसके अलावा गौ सेवा भी बहुत शुभ मानी जाती है। इससे पुण्य बढ़ता है और व्रत की सफलता सुनिश्चित होती है। पारण करने के बाद घर के बुजुर्गों या वरिष्ठों का आशीर्वाद लेना आवश्यक होता है। उनका आशीर्वाद आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है।

राधा अष्टमी व्रत के दिन क्या न करें

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पूजा में जो भी भोग राधा रानी को अर्पित किया जाना है, वह पूरी तरह शुद्ध और बिना किसी स्पर्श के होना चाहिए। भोग बनाने के बाद उसे चखना या किसी भी तरह से झूठा करना वर्जित है। व्रत के दिन दिन में सोना धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना गया है। इससे व्रत की तपस्या में बाधा आती है और इसका फल कम हो सकता है। इस शुभ दिन शरीर की कटिंग जैसे बाल, नाखून या दाढ़ी काटना वर्जित होता है। इसे अशुद्धता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इससे बचना चाहिए। इस दिन काले या बहुत गहरे रंग के कपड़े पहनने से परहेज़ करें। राधा रानी को लाल और पीले रंग अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इन्हीं रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा करते समय महिलाओं को बाल बांधकर रखने चाहिए और सिर को चुनरी से ढकना चाहिए। यह श्रद्धा और शुद्धता का प्रतीक होता है। पुरुषों को भी सिर पर रुमाल या कपड़ा रखना चाहिए। राधा अष्टमी की तिथि के दौरान बाल धोना वर्जित माना जाता है। यदि बाल धोने की आवश्यकता हो तो यह कार्य अष्टमी शुरू होने से पहले कर लेना चाहिए।

पूजा सामग्री

पुष्प और फूलों की माला

रोली एवं अक्षत

सुगंध और चंदन

सिंदूर

फल

केसरयुक्त खीर

राधा रानी के वस्त्र और आभूषण

इत्र

देसी घी का दीपक

अभिषेक के लिए पंचामृत

राधा अष्टमी पूजा विधि

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर एक साफ चौकी रखें और उस पर राधा रानी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाकर श्रृंगार करें और षोडशोपचार विधि से पूजन आरंभ करें। राधा रानी के मंत्रों का जाप करें तथा उनकी कथा का पाठ या श्रवण करें। अंत में आरती करें और केसर वाली खीर सहित भोग अर्पित करें।

- डा. अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

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