By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 28, 2026
नयी दिल्ली, 28 जुलाई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान जंतर-मंतर के पास भीड़ को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी की अनुमति के तहत प्लास्टिक पैलेट गन समेत कई कम घातक हथियारों का इस्तेमाल किया था। अधिकारियों ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस घटना की जानकारी संसद मार्ग थाने की सामान्य डायरी (जीडी) में 22 जुलाई को अपराह्न 1 बजकर 24 मिनट पर दर्ज की गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आरएएफ की अन्य टुकड़ियों ने अन्य विरोध स्थलों पर भी पैलेट गन का इस्तेमाल किया था या नहीं। दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों” के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे पूरी तरह “झूठे और भ्रामक” हैं। सीआरपीएफ और आरएएफ ने अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पैलेट गन के एक राउंड में प्लास्टिक के चार छर्रे होते हैं। ये धातु के उन छर्रों से अलग होते हैं, जो शरीर को भेद सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, प्लास्टिक के इन छर्रों से अपेक्षाकृत कम नुकसान होता है।
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग, विशेषकर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है और संसद में गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग कर रहा है। नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आहूत इस विरोध मार्च के दौरान दो-तीन प्रदर्शनकारियों के पैलेट लगने से गंभीर रूप से घायल होने की खबरें सामने आई थीं।
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सीजेपी ने अपना लगभग एक महीने से जारी आंदोलन वापस ले लिया। इस प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस, आरएएफ और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कई जवान भी घायल हुए थे। सीआरपीएफ के महानिदेशक जी. पी. सिंह ने कहा है कि इन प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई की समीक्षा की जा रही है।
उन्होंने कहा, “अब जबकि आंदोलन समाप्त हो चुका है और प्रदर्शनकारी हट चुके हैं, हम हर बड़े अभियान के बाद की तरह इस कार्रवाई का भी पेशेवर ढंग से आकलन करेंगे। इसके बाद बल मुख्यालय का आधिकारिक रुख आपके सामने रखा जाएगा।” अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को यहां सीआरपीएफ के 88वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में महानिदेशक ने बल के अधिकारियों और जवानों को आश्वस्त किया कि कर्तव्य के सद्भावनापूर्ण और ईमानदार निर्वहन के दौरान उनके द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय या की गई किसी भी कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी वह स्वयं लेंगे।