भारत में बनेगा राफेल विमान, हो गया बड़ा ऐलान!

By अभिनय आकाश | Jun 15, 2026

भारत जो अब एक तरह से रक्षा क्षेत्र में जो भारत का परिपेक्ष है वह यह है कि ज्यादा से ज्यादा आगे जाते हुए मेक इन इंडिया के कांसेप्ट को आगे ले जाते हुए  डेवलपमेंट को डिजाइन को प्रोडक्शन और को मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में जाना चाहते हैं और इस इसके चलते जितना जितना ज्यादा प्रोडक्शन जितना ज्यादा डिजाइन जितनी ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग भारत में हो सके उतना कितना अच्छा है और वो  प्रेफरेंस रहेगी। पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैनुअल मैक्रों की मुलाकात में रक्षा सहयोग एक बार फिर प्रमुख एजेंडे में रहा। खासतौर पर राफेल लड़ाकू विमान कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा हुई। इस बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने खुद इस बात की जानकारी दी कि राफेल को लेकर भारत और फ्रांस के बीच चर्चा आगे बढ़ चुकी है और अब फोकस सिर्फ खरीद पर नहीं बल्कि भारत में निर्माण और तकनीक साझेदारी पर है। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने बताया कि पीएम मोदी और मैक्रों ने द्विपक्षीय संबंधों के लगभग सभी अहम क्षेत्रों पर चर्चा की। इसमें रक्षा, सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार, निवेश, तकनीक, इनोवेशन, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषय शामिल रहे। राफेल कार्यक्रम पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश सचिव ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में अच्छी प्रगति हुई। हालांकि उन्होंने किसी नई डील या संख्या का खुलासा नहीं किया। 

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विदेश सचिव ने यह भी कहा कि चाहे राइफल हो या कोई अन्य रक्षा प्लेटफार्म भारत चाहता है कि उसमें अधिकतम स्थानीय सामग्री स्थानीय निर्माण यानी कि लोकल मैन्युफैक्चरिंग और भारतीय उद्योग की भागीदारी हो। भारत फ्रांस रक्षा सहयोग को भी इसी दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। आपको बता दें भारत ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे थे जिसकाइस्तेमाल हमारी भारतीय वायुसेना कर रही है। यह विमान भारतीय वायुसेना के दो स्क्वाड्रन में शामिल है और अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर तैनात है। हाल के सालों में राफेल भारतीय वायुसेना की सबसे ताकतवर लड़ाकू क्षमता का अहम हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा भारत ने नौसेना के लिए 26 राफेल एम विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी जो विमान वाहक पोतों से उड़ान भर सकेंगे। लंबे समय से 114 मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना पर काम कर रही है। इस बहुचरर्चित परियोजना में राफेल प्रमुख दावेदार माना जा रहा है और भारत की कोशिश है कि अगर भविष्य में कोई बड़ा सौदा होता है तो विमानों का बड़ा हिस्सा भारत में बने और भारतीय कंपनियां भी उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा बने। विदेश सचिव के बयान को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। रही बात राफेल की खासियत की तो आपको बता दें यह 4.5 पीढ़ी का अत्याधुनिक मल्टी रोल लड़ाकू विमान है। हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन में सक्षम है। मिडोर मिसाइल से लंबी दूरी पर दुश्मन के विमान को मार गिराने की क्षमता रखता है।

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