By अभिनय आकाश | Oct 08, 2026
भारत ने एक बार फिर आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को निशाने पर लिया है। भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि दुनिया 2008 के मुंबई आतंकी हमलों और 22 अप्रैल के पहलगाम हमले को भूली नहीं है। साथ ही, यह भी दोहराया है कि आतंकवाद को उसके फाइनेंसरों और प्रायोजकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए बिना नहीं हराया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी मिशन के सदस्य रघु पुरी ने ये बातें कहीं। उन्होंने UN महासभा की छठी समिति में 'अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपाय' एजेंडा आइटम पर पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान के जवाब में दिल्ली का 'जवाब देने का अधिकार' इस्तेमाल करते हुए ये टिप्पणियां कीं। पुरी ने कहा कि पाकिस्तान ने खुद को पीड़ित के तौर पर पेश किया है, लेकिन उसने ऐसे 'फ्रेंकस्टीन' पैदा किए हैं, जिन पर से उसका नियंत्रण खत्म हो गया है और जो अब पड़ोसी देशों में तबाही मचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब आतंकवादी समूहों को सरकारी राजनीतिक संरक्षण में काम करने की छूट दी जाती है, तो अंतरराष्ट्रीय वादे बेमानी हो जाते हैं और जब दोषियों को सुरक्षित पनाहगाह मिलती है, तो आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता। पुरी ने कहा दुनिया 9/11 और ओसामा बिन लादेन समेत उसके दोषियों के पकड़े जाने की घटना को नहीं भूली है। दुनिया 26/11 को नहीं भूली है। दुनिया पहलगाम को नहीं भूली है। उन्होंने आगे कहा कि "दुर्भाग्य से" यह सूची बहुत लंबी और दुखद है। उन्होंने कहा पहलगाम में पीड़ितों से उनकी राजनीतिक विचारधारा के बारे में नहीं, बल्कि उनके धर्म के बारे में पूछा गया था। इसलिए यह बहुत अजीब बात है कि पाकिस्तान धार्मिक नफरत से लड़ने की बात तो करता है, लेकिन साथ ही ऐसी स्थितियों को भी बढ़ावा देता है जिनसे यह नफरत बनी रहती है और पनपती है, खासकर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर।