By अंकित सिंह | Mar 24, 2026
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया संकट पर संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणियों पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति कमजोर हो गई है और एक व्यक्तिगत नीति बनकर रह गई है। संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए गांधी ने दावा किया कि अगर प्रधानमंत्री की छवि खराब है, तो हमारी विदेश नीति भी खराब है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भारत का कूटनीतिक रुख मोदी की निजी विदेश नीति में बदल गया है और कहा कि हर कोई इसे एक मज़ाक समझता है।
गांधी ने अपनी आलोचना को वैश्विक धारणाओं से जोड़ते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भली-भांति पता है कि मोदी क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते। उन्होंने अपने इस आरोप को दोहराया कि सर्वोच्च स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया स्वतंत्र नहीं है, और जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री वही करेंगे जो अमेरिका और इज़राइल कहेंगे। वे भारत और उसके किसानों के हित में काम नहीं करेंगे।
विपक्ष के नेता ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के संदर्भ में संसद को संबोधित करते हुए मोदी द्वारा कोविड-19 महामारी का जिक्र करने पर भी आपत्ति जताई। गांधी ने कहा कि कल उन्होंने एक अप्रासंगिक भाषण दिया। वे भारत के प्रधानमंत्री हैं, उन्हें भारत के प्रधानमंत्री के रूप में ही व्यवहार करना चाहिए, उनका कोई पद नहीं है। महामारी के दौरान झेली गई कठिनाइयों का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा, "मोदी जी ने कहा कि कोविड जैसा समय आने वाला है। वे भूल गए हैं कि तब क्या हुआ था, कितने लोग मरे थे और किस तरह की त्रासदी घटी थी।" उन्होंने सुझाव दिया कि मौजूदा हालात में महामारी का जिक्र करना असंवेदनशीलता और समझ की कमी दर्शाता है।