By एकता | Jun 14, 2026
विपक्षी गठबंधन एक बार फिर अंदरूनी कलह के संकट में घिर गया है। इस बार कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच दरारें खुलकर सामने आ गई हैं। विवाद की वजह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक बयान है। दरअसल, पिछले हफ्ते एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीएम के कद्दावर नेता पिनाराई विजयन को गले लगाने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद से सहयोगी दल उनकी तीखी आलोचना कर रहे हैं।
बता दें कि केरल में सीपीएम और कांग्रेस एक-दूसरे के कड़े विरोधी हैं, जहां कांग्रेस ने हाल ही में विजयन को सत्ता से बाहर किया है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर दोनों पार्टियां एक ही गठबंधन का हिस्सा हैं।
राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर पिनाराई विजयन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारे बीच गले मिलने का कोई रिवाज नहीं है और उनकी बातचीत हमेशा औपचारिक हाथ मिलाने तक ही सीमित रहती है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, "मुझे गले न मिलने से कोई आपत्ति नहीं है। मुझे चिंता उस टिप्पणी के पीछे छिपे राजनीतिक संदेश को लेकर है। यह राहुल गांधी के नजरिए और इंडी गठबंधन को लेकर उनकी सोच को दिखाता है।"
इस विवाद के बाद लेफ्ट पार्टियों ने कांग्रेस पर दबाव बढ़ा दिया है। सीपीएम के सीनियर नेता एमए बेबी ने कहा कि किसी ने राहुल गांधी से विजयन को गले लगाने के लिए नहीं कहा था, लेकिन उन्हें विजयन की गिरफ्तारी की मांग करना बंद कर देना चाहिए। वहीं, वृंदा करात ने कड़े शब्दों में कहा, "कम्युनिस्टों को किसी से गले मिलने की जरूरत नहीं है। हमें साफ-सुथरी राजनीति चाहिए। राहुल गांधी आप अपना गले मिलना अपने पास ही रखें, लेकिन विपक्ष के नेता के तौर पर पिनराई विजयन जैसे सीनियर नेताओं का सम्मान करना सीखें।"
विपक्ष की इस अंदरूनी लड़ाई पर बीजेपी ने भी तीखा हमला बोला है। बीजेपी ने विपक्षी गुट को 'सुविधा का गठबंधन' करार दिया। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, "इस गठबंधन में सिर्फ फूट है, कोई मिशन नहीं है। यह गठबंधन सिर्फ कागजों पर ही दिखाई देता है, जमीन पर नहीं। ये दल फोटो खिंचवाने के लिए तो साथ आ सकते हैं, लेकिन इनके दिल कभी नहीं मिल सकते।"