By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 18, 2019
वायनाड/अलाथुर (केरल)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री केवल झूठ बोलते हैं और गरीबों से चोरी करते हैं। वायनाड, मलप्पुरम और कोझिकोड़ जिलों में फैले अपने वायनाड लोकसभा क्षेत्र में तीन रैलियां करने और पल्लकड जिले के तीर्थाला में चुनाव प्रचार करने वाले गांधी ने मोदी और आरएसएस को निशाने पर लिया एवं भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने शाम को तीर्थाला में अपने प्रचार अभियान का समापन करते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री जितना जो कुछ करते हैं, वह यह है कि वह झूठ बोलते हैं और गरीबों से चोरी करते हैं। जिस दिन पुलवामा हमला हुआ, उसी दिन उनके दोस्त अडानी को छह हवाई अड्डे दिये गये। और वह (मोदी)कहते हैं कि वह कालेधन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।’’ गांधी ने कहा, ‘‘मोदी कहते हैं कि नोटबंदी कालेधन के खिलाफ संघर्ष के लिए था लेकिन उसने भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया। पचास लाख लोगों का नोटबंदी के बाद काम छूट गया। ’’
इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आरोप, कांग्रेस की एकमात्र मंशा लोगों को बांटना
गांधी ने कहा कि जिन किसानों ने महज मामूली कर्ज लिया वे उसका नहीं भुगतान करने पर जेल में हैं जबकि 35000 करोड़ रूपये का ऋण लेने वाले स्वतंत्र घूम रहे हैं। मोदी और आरएसएस पर तीखे हमले करते हुए उन्होंने कहा कि केरल के मुद्दे राज्य के लोगों को सुलझाना चाहिए, मोदी या आरएसएस प्रमुख को नहीं। वायनाड में तीन विशाल रैलियों को संबोधित करते हुए गांधी ने भाजपा नीत राजग सरकार की जमकर आलोचना की और कहा कि भगवा पार्टी की रूचि देश के लोगों पर बस अपनी विचाराधारा थोपने में है। उन्होंने कहा कि केरल के मुद्दों का फैसला राज्य के लोगों द्वारा होना चाहिए न कि मोदी और आरएसएस प्रमुख द्वारा। उन्होंने वायनाड के वंदूर में एक रैली में कहा, ‘‘मोहन भागवत हमें इतिहास और संस्कृति का पाठ पढ़ाने वाले होते कौन हैं? केरल को केरल के लोगों द्वारा चलाया जाना चाहिए। हर राज्य में यही भावना है।’’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए गांधी ने कहा कि वह यहां अपने ‘‘मन की बात’’ कहने नहीं आए हैं बल्कि यहां लोग जो समस्याएं झेल रहे हैं जैसे कि रात में यात्रा पर प्रतिबंध, मानव-पशु संघर्ष और चिकित्सा सुविधाओं में अभाव आदि को समझने आए हैं। गांधी ने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि यहां जटिल समस्याएं हैं। मानव-पशु संघर्ष है। विकास और पर्यावरण के बीच टकराव है... मैं समाधान होते हुए देखना चाहता हूं। मैं समाधान थोपने में यकीन नहीं करता। मैं ऐसे मुद्दों के समाधान में अपने लोगों की समझदारी एवं बुद्धिमानी में विश्वास करता हूं।’’