विरासत के सहारे जीत की तलाश करते हुए राहुल गांधी

By सुरेश हिंदुस्तानी | May 06, 2024

कांग्रेस नेता राहुल गांधी उत्तरप्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव न लड़ पाने की हिम्मत के बाद आखिर परम्परागत रायबरेली से नामांकन दाखित कर दिया। यह बात सही है कि राहुल गांधी के अमेठी छोड़ने के बाद कांग्रेस राजनीति में कोई ठोस सन्देश देने में सफल नहीं हो रही थी, जिसके कारण कांग्रेस के कई नेता अमेठी के बारे में बोलने से किनारा करने लगे थे। अब राहुल गांधी अपने दादा फिरोज खान, दादी इंदिरा गांधी और माँ सोनिया गांधी की विरासत को बचाने के लिए मैदान में आ गए हैं। यहाँ सवाल यह नहीं हैं कि राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस ने रायबरेली को क्यों चुना, बल्कि सवाल यह है कि राहुल गांधी ने अमेठी को क्यों छोड़ा। क्या वास्तव में राहुल गांधी को फिर से अपनी पराजय का डर लगने लगा था? अगर यह सही है तो फिर ऐसा क्यों है कि राहुल गांधी हर बार अपने लिए सुरक्षित स्थान की तलाश क्यों करते हैं। उल्लेखनीय है कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अमेठी में अपनी ज़मीन खिसकती दिखाई दी, तब उन्होंने एकदम सुरक्षित लगने वाली सीट केरल की वायनाड को चुना। वहाँ से चुनाव जीते जरूर, लेकिन अमेठी की हार कांग्रेस परिवार की हार थीं, जिसे कांग्रेस आज तक भुला नहीं पायी है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को अमेठी से चुनाव लड़ाना खतरे से खाली नहीं था।

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वर्तमान में कांग्रेस के लिए यह पेचीदा सवाल ही था कि कांग्रेस की ओर से अमेठी और रायबरेली से किसको प्रत्याशी घोषित किया जाए, क्योंकि इन दोनों सीटों पर प्रथम तो गांधी परिवार का पुख्ता दावा बनता था। इसलिए दोनों क्षेत्रों में से किसी एक से प्रियंका वाड्रा को चुनाव मैदान में उतारने की क़वायद भी की जा रही थी, लेकिन प्रियंका को इस बार चुनाव लड़ने से दूर कर दिया। लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या राहुल गांधी के रायबरेली से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कांग्रेस अमेठी के चुनाव को गंभीरता से लेगी, क्योंकि अब कांग्रेस का पूरा जोर राहुल गांधी को जिताने में लगेगा। राहुल गांधी को जिताना कांग्रेस की मज़बूरी है, क्योंकि अब राहुल गांधी ही नहीं, पूरी कांग्रेस की साख दांव पर लगी है। अगर कांग्रेस रायबरेली से चुनाव हारती है तो देश में कांग्रेस के बारे में गलत सन्देश जाऐगा। यहां पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी आ रहा है कि राहुल गांधी द्वारा पिछले चुनाव में भी दो स्थानों से चुनाव लड़े थे, जिसमें अमेठी में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब वायनाड से उम्मीदवारी के बाद रायबरेली की रुख करके फिर से संदेह को जन्म दिया है। ऐसा लग रहा है कि इस बार वायनाड का चुनाव बहुत ही टक्कर का माना जा रहा है। कुछ खबरें तो राहुल गांधी के हारने तक की बात कह रही हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि इसलिए ही राहुल गांधी को फिर से दो स्थानों से चुनाव लड़ाया जा रहा है। राहुल गांधी का उत्तरप्रदेश से चुनाव लड़ना कोई नया नहीं है, वे अमेठी से भी चुनाव लड़ चुके हैं। इसलिए उनके नाम का जादू कोई नया प्रभाव छोड़ेगा, यह पूरी तरह विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता।

- सुरेश हिन्दुस्थानी,

वरिष्ठ पत्रकार

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