कांग्रेस से बिखरती जा रही राहुल की युवा बिग्रेड, क्या नहीं दिख रहा भविष्य?

By अंकित सिंह | Jun 10, 2021

जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़ने के बाद एक बार फिर से देश की सबसे पुरानी पार्टी को लेकर चर्चा जारी है। सबसे ज्यादा इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या कांग्रेस में युवा नेताओं को भविष्य नहीं दिख रहा? क्या पार्टी सबको साथ लेकर चलने में कामयाब नहीं हो पा रही है? पार्टी में किसी की सुनवाई नहीं हो रही है? इसके साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी युवा बिग्रेड और पुराने नेताओं के बीच बंट गई है? समय-समय पर युवा बिग्रेड पार्टी के खिलाफ मुखर आवाज उठाते रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया तो पिछले साल ही भाजपा में शामिल हो गए। अब जितिन प्रसाद ने भी कांग्रेस को झटका देते हुए भगवा दामन थाम लिया।

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हालांकि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह सभी नेता कांग्रेस के सच्चे सिपाही थे। परंतु राहुल के अध्यक्ष पद से हटने के बाद और सोनिया गांधी की टीम के सक्रिय होने के बाद से पार्टी के अंदर इन्हें अपना भविष्य नहीं दिख रहा था। पार्टी में उन लोगों को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा जो राहुल के समय हासिए पर थे। इसके अलावा पार्टी चुनावी हार के बाद भी उस तरह से मंथन नहीं कर रही है जिससे कि उसे मजबूती मिल सके। वर्तमान में देखें तो जितिन के जाने और सचिन पायलट के विरोधी सुरों के टाइमिंग पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। कहीं ना कहीं पार्टी को यह नेता कड़े और बड़े संदेश देने की लगातार कोशिश करते रहे हैं। इस बात की चर्चा तेज हो गई है क्या सचिन पायलट भी पार्टी छोड़ देंगे?

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दूसरी तरफ देखे तो मिलिंद देवड़ा काफी समय से नाराज चल रहे हैं और उन्हें मनाने की अब तक कोई कोशिश नहीं की गई है। कांग्रेस में युवाओं को आगे बढ़ाने से ज्यादा वर्तमान में बुजुर्गों को ही महत्व दिया जा रहा है। यही कारण है कि पार्टी की अगली पीढ़ी बिखरती हुई नजर आ रही है। इसमें कहीं दो राय नहीं है कि राहुल की टीम में जो भी नेता थे वह सब पढ़े लिखे और आधार वाले नेता थे। ऐसे में यह सभी नेता पार्टी के लिए लंबे समय तक अपनी सेवा दे सकते थे। यूपी चुनाव से पहले जितिन प्रसाद का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका हो या नहीं हो लेकिन यह बात तो तय है कि इससे कांग्रेस के सवर्ण वोट में बिखराव जरूर आएगा। 

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