बारिश मस्त प्रशासन ध्वस्त (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Jun 28, 2024

लो जी, मानसून आ गया। अब इस बारे कोई बहस नहीं होनी चाहिए कि यह मानसून ही है या मानसून से पहले आने वाला मानसून। मस्त बात यह है कि इससे पहले कि प्रशासन संभले, परम्परा के निमित प्रशासन ध्वस्त हो गया है। अभी तो बरसात संभालने के लिए हो सकने वाली सालाना बैठक भी आयोजित नहीं हो पाई है। गरमी इतनी ज़्यादा है कि पानी न मिलने की स्थिति में जगह जगह पानी के टैंकर भेजने का प्रबंध करने में ही सुबह से शाम हो रही है। अब बेचारा प्रशासन गरमी संभाले, बिजली की कमी संभाले, पानी की कमी संभाले या मानसून? बहुत मुश्किल काम है जी। 

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जहां कई साल से पानी नहीं बरसा, बरसात का पानी संग्रह करने की तमाम योजनाएं बह चुकी हैं, अतिरिक्त पानी रखने के लिए टैंक नहीं हैं, वहां जब अचानक बारिश होगी तो क्या होगा। प्रशासन ध्वस्त ही होगा जी। यहां तो स्मार्ट शहरों में भी गरमी के मौसम में पॉवर कट लगाने पड़ते हैं, बार बार झूठ बोलना पड़ता है कि बस अभी आधा घंटा में आ जाएगी। बिजली तो आती नहीं, आंधी और बारिश आ जाती है और स्मार्ट प्रशासन भी ध्वस्त हो जाता है। 

जब बारिश नहीं होती तो सूखी खेती, उजडती फसलों को बचाने के लिए अपने अपने खास देवताओं को पटाकर बारिश करवाने के लिए हवन यज्ञ करने की रिवायत है। किसी बड़े नेता ने, बड़े आयोजन, उत्सव या उदघाटन में आना हो तो स्थानीय नेता अपने आराध्य से निवेदन करते हैं कि बारिश न करें जी। बारिश की ज़रूरत न हो तो रुकवाने के लिए हवन करते हैं जी। ऐसे में उपरवाला विमूढ़ होकर मस्त बारिश करता है और ध्वस्त प्रशासन होता है जी।

- संतोष उत्सुक

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