उत्तर भारतीयों से माफी मांग कर ही राजनीति में आगे बढ़ सकते हैं राज ठाकरे

By अजय कुमार | May 13, 2022

प्रभु राम की नगरी अधोध्या में एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ गई है। यह हलचल अगले माह महाराष्ट्र के कट्टर विरोधी दो दिग्गज नेताओं के अयोध्या कार्यक्रम से बढ़ी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे 5 जून को अयोध्या आ रहे हैं जबकि उनके भतीजे और उद्धव ठाकरे के मंत्री पुत्र और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे 10 जून को अयोध्या आएंगे। महाराष्ट्र के कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले भी जल्द ही अयोध्या में नजर आ सकते हैं। मिली खबर के मुताबिक अयोध्या के दशरथ गद्दी के महंत बृज मोहन दास ने नाना पटोले को अयोध्या आने का न्योता दिया है। महंत ने महाराष्ट्र कांग्रेस के कार्यालय में जाकर नाना पटोले से मुलाकात भी की है। हालांकि पटोले की अयोध्या यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है। बता दें कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पोते रोहित पवार भी पिछले दिनों अयोध्या आकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं। चर्चा यह भी है कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के अयोध्या आने का कार्यक्रम भी बनाया जा रहा है। महाराष्ट्र में हिन्दुत्व की सियासी जंग अयोध्या में मुखर होकर दिखाई दे रही है तो दूसरी तरफ मनसे और शिवसेना नेताओं के दौरे को लेकर पोस्टर वॉर भी शुरू हो गई है। शिवसेना ने अपने पोस्टरों में लिखा है, 'असली आ रहा है, नकली से सावधान।’ शिवसेना राज ठाकरे को नकली राम भक्त बता रही है।

राजनैतिक पंडितों का कहना है कि शिवसेना के बीजेपी से दूरी बना लेने के बाद बीजेपी को महाराष्ट्र में नये साथी की तलाश है और इसके लिए उसे राज ठाकरे सही विकल्प लग रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने हाल ही में मस्जिदों पर लाउडस्पीकर का मुद्दा उठाया और जवाब में हनुमान चालीसा के पाठ का ऐलान किया था। उसके बाद से महाराष्ट्र में हिंदुत्व का मुद्दा चरम पर पहुंच गया है। बीजेपी आलाकमान महाराष्ट्र में राज ठाकरे को शिवसेना प्रमुख के समानांतर हिन्दुत्व के नये चेहरे के रूप में पेश करना चाहती है। हिन्दुत्व की अलख जगाने के लिए ही ठाकरे लाउडस्पीकर पर अजान जैसे संवेदनशील मुद्दों को हवा दे रहे हैं। अयोध्या आगमन भी इसी का एक हिस्सा है, लेकिन राज ठाकरे के लिए तब तक महाराष्ट्र की सत्ता का रास्ता आसान नहीं लगता है जब तक कि वह उत्तर भारतीयों को लेकर दिए गए विवादित बयान से माफी मांग कर किनारा नहीं कर लेते हैं।

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महाराष्ट्र में मुम्बई, नासिक, पुणे, नागपुर, अमरावती सहित कई ऐसे जिले हैं, जहां बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय वोटर हैं जो किसी भी चुनाव में निर्णायक साबित होते हैं। अभी तक इन वोटरों पर बीजेपी का दबदबा है, यदि भविष्य में बीजेपी के साथ राज ठाकरे आते हैं तो राज की उत्तर भारतीय विरोधी छवि का नुकसान बीजेपी को भी उठाना पड़ सकता है। इसीलिए राज ठाकरे अपनी छवि सुधारना चाहते हैं। हो सकता है कि अयोध्या दौरे से पूर्व वह उत्तर भारतीयों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट भी कर दें।  

    

बात शिवसेना नेताओं के अयोध्या दौरे की की जाए तो उसकी अपनी मजबूरी है। दरअसल, शिवसेना के एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद से शिवसेना हिन्दुत्व को लेकर बैकफुट पर नजर आ रही है। क्योंकि एनसीपी हो या कांग्रेस, दोनों ही दल हमेशा से स्वयं को सेक्युलर दिखाने की कोशिश करते आए हैं। इसीलिए इन दोनों के साथ सरकार बनाने के बाद से शिवसेना की वह हिंदुत्व वाली धार कमजोर होती दिख रही है, जिस पर महाराष्ट्र में कभी उसका एकाधिकार हुआ करता था। इसी खाई को पाटने के लिए शिवसेना अयोध्या आकर अपनी हिन्दुत्व वाली पुरानी छवि मुखर करना चाहती है। वैसे शिवसेना का अयोध्या से लगाव पुराना नहीं है। एक समय था जब शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे छाती ठोंक कर कहा करते थे कि 1992 में अयोध्या में रामजन्म भूमि पर बने विवादित ढांचे को शिवसैनिकों ने गिराया था। मगर अब उद्धव ठाकरे यह बात कहने से कतराते हैं।

-अजय कुमार

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