राजस्थान उच्च न्यायालय ने Ranthambore में अवैध संपत्तियों और निर्माणों को जब्त करने को कहा

By Prabhasakshi News Desk | Oct 02, 2024

जयपुर । राजस्थान उच्च न्यायालय ने वन अधिकारियों को रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के वन क्षेत्र और बाघ आवासीय (क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट) इलाकों में अवैध संपत्तियों तथा निर्माणों को जब्त-कुर्क करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने सवाई माधोपुर के जिला प्रशासन और पुलिस को वन अधिकारियों के साथ सहयोग करने का भी निर्देश दिया और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को मामले की निगरानी करने को कहा है। न्यायमूर्ति समीर जैन की अदालत ने मंगलवार को इस संबंध में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए रणथंभौर में महत्वपूर्ण बाघ आवासीय इलाकों में किए जा रहे निर्माण और अतिक्रमण पर चिंता व्यक्त की। 

उन्होंने बताया कि रणथंभौर में बाघ क्षेत्र में अतिथि गृह सहित कई निर्माण गतिविधियां की जा रही हैं, जो वनस्पतियों और जीवों के लिए खतरा हैं और इन्हें तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए तथा निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रणथंभौर के मुख्य वन संरक्षक, सवाई माधोपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट से बात की।

 न्यायालय के आदेश के अनुसार, ‘‘संबंधित अधिकारियों ने न्यायालय को इस तथ्य से अवगत कराया कि वन विभाग/संबंधित अधिकारी उचित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं, फिर भी, प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से सहयोग व सहायता की कमी के कारण उचित उपाय प्रभावी ढंग से नहीं किए जा रहे हैं।’’ मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी। उत्तर भारत के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों में से एक रणथंभौर में 70 से अधिक बाघ रहते हैं। इसका कुल क्षेत्रफल 1700.22 वर्ग किलोमीटर है जिसमें से 1113.364 वर्ग किलोमीटर को ‘क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट’ और 297.92 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ‘बफर’ क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया है।

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