By नीरज कुमार दुबे | Jun 22, 2026
राजस्थान में सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर में आठ महिलाओं को सर्जरी से प्रसव के पश्चात गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो गयी हैं जिससे हर कोई हैरान है। इसी बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने यह कह कर नया विवाद खड़ा कर दिया है कि प्रसव पीड़ा से बचने के लिए महिलाएं सर्जरी के जरिये बच्चा पैदा करना चाहती हैं। जहां तक ताजा घटनाक्रम की बात है तो आपको बता दें कि जोधपुर के जिला अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव के बाद आठ महिलाओं को गुर्दा फेल होने समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो गई हैं।। महिलाओं ने सर्जरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और निम्न रक्तचाप की शिकायत की। इनमें से दो महिलाओं को गंभीर गुर्दा संक्रमण हो गया, जिसके बाद उन्हें मथुरादास माथुर अस्पताल रेफर किया गया। वहां उनका उपचार गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में किया जा रहा है।
वहीं जोधपुर की घटना की बात करें तो आपको बता दें कि एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य बीएस जोधा ने बताया कि शनिवार को सर्जरी से आठ प्रसव कराए गए। उन्होंने बताया कि जब दो महिलाओं की हालत बिगड़ी, तो उन्हें एमडीएम अस्पताल भेजा गया, जबकि शेष छह महिलाओं का इलाज जिला अस्पताल में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जबकि दूसरी जो मधुमेह से पीड़ित है उसे निम्न रक्तचाप और रक्ताल्पता हो गई। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थितियां गुर्दों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। जिला अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी कुलबीर चोपड़ा ने बताया कि जिला अस्पताल में भर्ती छह महिलाओं की स्थिति फिलहाल स्थिर है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि रिपोर्ट मिलने तक ऑपरेशन नहीं किए जाएंगे।
दूसरी ओर, यह मामला अब राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ चुका है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में सर्जरी से प्रसव के बाद आठ महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। गहलोत ने कहा कि सर्जरी के बाद महिलाओं में सेप्टीसीमिया और गुर्दें संबंधी जटिलताएं विकसित होने की खबरें अत्यंत चिंताजनक हैं, यह चिकित्सा मानकों में भारी गिरावट और गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘‘कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर से आठ महिलाओं की हालत बिगड़ने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं।’’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि एक तरफ शहर में सरकारी आयोजन और वीआईपी दौरों की चमक बिखेरी जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ माताओं-बहनों की जिंदगी खतरे में थी और प्रशासन सच्चाई छिपाने में लगा रहा। अशोक गहलोत ने कहा कि सेप्टीसीमिया और किडनी फेल होने जैसी जटिलताएं स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती हैं। उन्होंने बताया कि वे जोधपुर जाकर प्रभावित मरीजों और उनके परिजन से मुलाकात करेंगे।
वहीं, इस मामले को लेकर राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बयान पर हंगामा मच गया है। उन्होंने सिजेरियन डिलीवरी के बढ़ते मामलों पर कहा कि आज की युवा पीढ़ी प्रसव पीड़ा नहीं चाहती, इसलिए सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मरीज विभिन्न अस्पतालों में इलाज के दौरान धक्के खाते हुए आखिरकार मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचते हैं, ऐसे में हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मातृ मृत्यु दर मात्र एक प्रतिशत है।