Rajeev Chandrasekhar और P Chidambaram में Chhattisgarh Naxal Attack पर तीखी बहस

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 09, 2026

तिरुवनंतपुरम, नौ सितंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरलम इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बीच 2013 में छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है। इस हमले में कांग्रेस के कई नेता मारे गए थे। यह बहस अदालत के उस फैसले के कुछ दिन बाद शुरू हुई, जिसमें बस्तर क्षेत्र में 25 मई 2013 को कांग्रेस के काफिले पर हुए भीषण हमले के मामले में 10 लोगों को दोषी ठहराया गया।

कुछ दिन पहले अदालत ने 10 लोगों को दोषी ठहराया।’’ इसके बाद उन्होंने चिदंबरम की हालिया टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कांग्रेस नेता ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया था। यह एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल भाजपा नेता उन लोगों पर हमला करने के लिए करते हैं, जिन पर वे नक्सलवाद के वैचारिक समर्थक होने का आरोप लगाते हैं। चंद्रशेखर ने पूछा, ‘‘ तो गृह मंत्री रहे पी. चिदंबरम स्वीकार करते हैं कि वह ‘दिमागी नक्सल’ थे या हैं।

तो क्या कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई के नेता भी इस विचारधारा के शिकार हुए?’’ उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी समस्याएं दशकों तक अनसुलझी क्यों रहीं। उन्होंने पूछा, ‘‘ क्या आपने कभी सोचा कि जड़ जमा चुकी नक्सल और आतंकवाद जैसी समस्याओं से निपटने और उन्हें हराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आने का इंतजार क्यों करना पड़ा?’’ इस पर चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ हमले से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय का पद छोड़ दिया था। चिदंबरम ने कहा, ‘‘ राजीव चंद्रशेखर की याददाश्त कमजोर हो गई है।

मैंने अगस्त 2012 में गृह मंत्रालय छोड़ दिया था। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं पर कायराना हमला मई 2013 में हुआ था।’’ चंद्रशेखर ने पलटवार करते हुए कहा कि चिदंबरम की जिम्मेदारी केवल हमले की तारीख तक सीमित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, ‘‘ मान लिया कि जिस दिन या जिस वक्त नक्सली हमला हुआ, उस वक्त आप गृह मंत्री नहीं थे।

लेकिन आप लगभग चार साल तक गृह मंत्री रहे।’’ चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘ मई 2013 में आपके कांग्रेस सहयोगियों की हत्या करने वाले नक्सली उस दिन जादू से सामने नहीं आए जिस दिन आप वित्त मंत्रालय में चले गए थे।’ उन्होंने आरोप लगाया कि चिदंबरम के गृह मंत्री रहने के दौरान ही माओवादी ‘फले-फूले, हथियार रखने लगे और सक्रिय होते गए’। चंद्रशेखर ने कहा कि हमले के समय गृह मंत्रालय में न होने का हवाला देना इस घटना में मारे गए कांग्रेस नेताओं की स्मृति का ‘अपमान’ है। दोनों नेताओं के बीच यह तीखी बहस चिदंबरम द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर कटाक्ष करने के कुछ सप्ताह बाद सामने आई है।

चिदंबरम ने तब कहा था, ‘‘मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।’’ चिदंबरम की प्रधानमंत्री पर यह टिप्पणी मोदी की उस चेतावनी के जवाब में आई थी, जिसमें उन्होंने देश को उन “दिमागी नक्सलियों” से सावधान रहने को कहा था, जो कथित तौर पर व्यवस्था में पैठ बना चुके हैं और नीतियों में हेरफेर करके समाज के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। मोदी ने नागरिकों से ऐसे लोगों को ‘‘पहचानने और अलग-थलग करने’’ का आग्रह किया था।

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