पोपटलाल के किरदार से दर्शकों को खूब हंसाया राजेन्द्र नाथ ने

By अमृता गोस्वामी | Feb 13, 2021

लोग सिनेमा देखने जाते हैं क्योंकि वे आम जिंदगी से हटकर कुछ मनोरंजन चाहते हैं, कुछ हल्की-फुल्की मजाक, कॉमेडी ताकि जीवन में नीरसता न रहे। लोगों की इसी दिलचस्पी को देखते हुए फिल्मों में मनोरंजन का, हास्य का अपना एक अलग महत्व रहा है।

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60 और 70 के दशक में राजेन्द्र नाथ ने कई फिल्मों में काम किया और अपनी कला से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया, खूब हंसाया। बतौर हास्य अभिनेता हिन्दी सिनेमा में राजेन्द्र नाथ ने तब एंट्री की जब महमूद, जानी वॉकर, मुकरी, केश्टो मुखर्जी जैसे दिग्गज हास्य अभिनेताओं का दौर था बावजूद इसके अपनी काबिलियत से राजेंद्र नाथ ने अपनी अलग पहचान बनाई। 

राजेन्द्र नाथ का जन्म 8 जून 1931 को हुआ था, उनका परिवार पेशावर का रहने वाला था। आजादी से पहले उनके पिता करतार नाथ मध्यप्रदेश में रीवा स्टेट के इंस्पेक्टर जनरल होकर आए जिनके साथ ही उनका परिवार भी मध्यप्रदेश आ गया। राजेंद्र नाथ के सात भाई और चार बहिन थीं। पृथ्वीराज कपूर से उनके परिवार के घनिष्ट संबंध थे। यहां तक की राजकपूर से राजेंद्र नाथ की बहन कृष्णा की शादी भी हुई। शादी के बाद राज कपूर ने प्रेम नाथ को मुंबई बुला कर पृथ्वी थियेटर में काम दिला दिया बाद में उनके भाई राजेंद्र नाथ और नरेंद्र नाथ भी मुंबई आ गए। राजेन्द्र नाथ की दूसरी बहन उमा ने बाद में अभिनेता प्रेम चोपड़ा से शादी की। 

1947 में राजेंद्र नाथ फिल्मो की रुपहली नगरी मुंबई में अपनी पढ़ाई  बीच में छोड़करआ गए थे। पहले तो वह प्रेम नाथ और बीना राय के साथ ही रहते थे। बाद में अलग रहने लगे। 1955 में हिंदी फिल्म ‘वचन’ के साथ उन्होंने बॉलीवुड में शुरुआत की। पृथ्वी थिएटर में राजेंद्र नाथ ने कुछ नाटकों में भी काम किया । 1959 से पहले राजेंद्र नाथ को फिल्मों में बहुत छोटी भूमिकाएं मिलीं जो उन्हें खास पहचान नहीं दिला सकीं किन्तु 1959 में उन्हें नासिर हुसैन की फिल्म ‘दिल देके देखो’ में काम करने का मौका मिला जिसमें उनकी भूमिका बड़ी व सराहनीय रही। 1961 में नासिर हुसैन की ही फिल्म ‘जब प्यार किसी से होता है’ में राजेंद्र नाथ के नए अवतार ने जन्म लिया जिसका नाम था ‘पोपटलाल’ और इस पोपटलाल की भूमिका में वे इतने लोकप्रिय हुए कि लोग उन्हें पोपटलाल के नाम से ही जानने लगे। पोपटलाल के किरदार में उनका ड्रेसप भी अनोखा था जिसे देखकर ही लोगों के चेहरों पर हंसी आ जाती। मोटे फ्रेम का चश्मा, ऊंची फ्राक, ढीली हाफ पैंट, सिर पर हैट के साथ उनकी अजीबोगरीब हरकतों ने उन्हें वह सफलता प्रदान की कि पोपटलाल के नाम से उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों में स्टेज शो किए। यह किरदार लोगों के बीच इतना लोकप्रिय हुआ कि कई फिल्मों और धारावाहिको में राजेंद्र नाथ के किरदार का नाम ‘पोपटलाल’ ही रखा गया।

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राजेन्द्र नाथ की लोकप्रिय फिल्मों में जब प्यार किसी से होता है, दिल देके देखो, फिर वही दिल लाया हूँ, जानवर, तुम हसीं मैं जवां, हमराही, राजकुमार, मेरे सनम, बहारों के सपने, झुक गया आसमान, प्यार का मौसम, बेटी, राजा साहब, प्रिंस, तीन बहुरानियां, मुझे जीने दो, फिर वही दिल लाया हूँ, एन इवनिंग इन पेरिस, जीवन मृत्यु, पूरब और पश्चिम, आन मिलो सजना, हरे रामा हरे कृष्णा, धड़कन, कहानी किस्मत की, शरारत, प्रेम रोग, वीराना, बोल राधा बोल इत्यादि हैं, उन्होंने तकरीबन दो सौ फिल्मों में काम किया। फिल्म हमराही में उन्होंने कॉमेडियन से हटकर विलेन का किरदार भी निभाया। हिंदी फिल्मों के अलावा वे पंजाबी, भोजपुरी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी दिखाई दिए। राजेंद्र नाथ ने कुछ समय ऑल इंडिया रेडियो और रेडियो सीलोन में बतौर जॉकी भी काम किया। 1974 में उन्होंने एक फिल्म का निर्माण किया लेकिन वह ज्यादा नहीं चली और वह कर्जे में डूब गए। टीवी धारावाहिक ‘हम पांच’ में भी राजेंद्र नाथ ने अभिनय किया था। 

राजेंद्र नाथ ने पर्दे पर भले ही हास्य भूमिका निभाई किन्तु वास्तविक जिंदगी में वह गंभीर थे। 1969 में उनकी शादी गुलशन कृपलानी से हुई, उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। अंतिम कई साल राजेंद्र नाथ फिल्मो से दूर होकर ज्यादातर समय घर पर ही बिता रहे थे। कुछ समय से उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी जिसके चलते 13 फरवरी, 2008 को उनका निधन हो गया। राजेंद्र नाथ आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं किन्तु अपने हास्य किरदार ‘पोपटलाल’ के साथ आज भी वे हमारे बीच जीवंत हैं।

- अमृता गोस्वामी

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