By नीरज कुमार दुबे | May 19, 2026
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। हम आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा निवासी भाटी के हालिया बयानों ने न केवल समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, बल्कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों को भी आक्रामक रुख अपनाने का मौका दे दिया है। विशेष रूप से ब्राह्मण, जाट और गुर्जर समाज को लेकर दिए गए उनके बयानों पर व्यापक विरोध देखने को मिल रहा है।
विवाद केवल ब्राह्मण समाज तक सीमित नहीं रहा। 14 मई को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित अखिल भारतीय जाट महासभा के कार्यक्रम में भाटी ने जाट और गुर्जर समाज को लेकर भी विवादित टिप्पणी कर डाली। किसान नेता चौधरी चरण सिंह और महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम में राकेश टिकैत और दीपेंद्र हुड्डा भी मौजूद थे। मंच से बोलते हुए भाटी ने जाट और गुर्जर समाज की पारिवारिक परंपराओं को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे समाज ने बेहद अपमानजनक माना। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
मुजफ्फरनगर में जाट महासभा के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर राजकुमार भाटी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। महासभा के जिला अध्यक्ष धर्मवीर बालियान ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो समाज अपने स्तर पर जवाब देना जानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाटी लगातार विभिन्न समाजों के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करते रहे हैं। जाट महासभा ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठाई।
इस पूरे विवाद के बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज या महिलाओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी उचित नहीं है। टिकैत ने यह भी कहा कि यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो राजकुमार भाटी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि सोशल मीडिया पर वीडियो के छोटे हिस्से वायरल किए जा रहे हैं और पूरे घटनाक्रम को भी समझने की जरूरत है।
हम आपको बता दें कि राजकुमार भाटी पहले भी कई विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। एक टीवी चैनल पर बहस के दौरान उन्होंने पैगंबर मुहम्मद को दुनिया का सबसे बड़ा महापुरुष बताया था। उन्होंने कहा था कि पैगंबर मुहम्मद धर्म संस्थापक, समाज सुधारक और शासक तीनों भूमिकाओं में सफल रहे। इस बयान को लेकर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
इसके अलावा भाटी ने रामचरितमानस पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस एक अच्छा काव्य है, लेकिन उसमें कई घटिया चौपाइयां हैं। साथ ही उन्होंने मनुस्मृति को कूड़ा बताया था। मंदिरों को लेकर भी उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह मंदिर नहीं जाते क्योंकि यह सिद्ध नहीं हो पाया है कि भगवान हैं या नहीं। इन बयानों को लेकर भी व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हुआ था।
उधर, विवाद बढ़ने के साथ अब कानूनी कार्रवाई भी तेज हो गई है। गाजियाबाद, नोएडा, सुलतानपुर और बागपत में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। बागपत कोतवाली में दर्ज प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 299 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं मुजफ्फरनगर में भी जाट महासभा के विरोध के बाद उनके खिलाफ धारा 356 और 196 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है तथा जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, लगातार बढ़ते विवादों के बीच राजकुमार भाटी ने सफाई देते हुए दावा किया है कि उन्हें ओबीसी होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का आईटी सेल उनके बयानों के छोटे हिस्से काटकर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहा है। हालांकि उनके खिलाफ विभिन्न समाजों में बढ़ता आक्रोश और दर्ज हो रही प्राथमिकी समाजवादी पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी हुई है।