सीमाओं की रक्षा-सुरक्षा के लिए राजनाथ सिंह की सक्रियता विरोधियों के लिए सीधी चेतावनी

By ललित गर्ग | Sep 08, 2020

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रालय को नये उन्मेष एवं भारत की रक्षा व्यवस्थाओं को सशक्तता प्रदत्त करते हुए देश एवं दुनिया को अहसास करा रहे हैं कि कोई भी राष्ट्र भारत को कमजोर समझने की भूल ना करे। पिछले कुछ सप्ताहों में राजनाथ सिंह की सक्रियता एवं शोहरत की बुलन्दियां एक नये परिवेश के निर्मित होने का संकेत दे रही हैं। उन्होंने मास्को में चीनी रक्षा मंत्री वे फेंगे के साथ भेंट में साफ कर दिया है कि शंघाई सहयोग सम्मेलन के देशों के साथ ही पूरे एशियाई व प्रशान्त क्षेत्र में आपसी शान्ति व सौहार्द का वातावरण बनाये रखने के लिए जरूरी है कि कोई भी देश आक्रामक तेवर अपनाने के स्थान पर सहकार, शांति और सह अस्तित्व की भावना से काम करे। यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण थी और बहुत महत्वपूर्ण रहा राजनाथ सिंह का सशक्त एवं प्रभावी तरीके से भारत का पक्ष रखना। इस बैठक का महत्व इसलिये भी है कि राजनाथ सिंह के नई दिल्ली लौटने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शंघाई सहयोग देशों के संगठन के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने मॉस्को जायेंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी विदेश मंत्री से होगी।

चीन ने लगातार अपनी कुटिल चालों और भारत की सीमाओं पर फैलाव की षड्यंत्रपूर्ण गतिविधियों से न केवल भारत बल्कि विश्व को तनाव और त्रास का वातावरण दिया साथ ही अनिश्चय और असमंजस की विकट स्थिति भी दी है। कोरोना महामारी के दौर में उसके द्वारा युद्ध जैसे वातावरण बनाने के प्रयत्नों को समूची दुनिया विडम्बनापूर्ण एवं दुर्भाग्यपूर्ण मान रही है। जबकि भारत ने विश्व शांति एवं दुनिया में अमन कायम करने को सुदृढ़ धरातल दिया है। मानवीय सहृदयता, शांति-सहिष्णुता और सह-अस्तित्व की भावना को सम्मान दिया है। अभय का वातावरण, शुभ की कामना और मंगल का फैलाव कर तीसरी दुनिया को विकास के समुचित अवसर और साधन की संभावना दी है। मनुष्य के भयभीत मन को युद्ध की विभीषिका से मुक्ति दी है। स्वयं अभय बनकर विश्व को निर्भय बनाया है। हम सदियों से प्रेम व भाइचारे के समर्थक रहे हैं मगर इसे कोई हमारी कमजोरी न समझे। भारत के आत्मसम्मान पर कोई आंच नहीं आने दी जायेगी। अपनी संकल्पबद्धता एवं कठोरता से राजनाथ सिंह ने अपनी बातचीत में इन्हीं बातों को स्पष्ट करते हुए बहुत ही शालीन एवं उदार तरीके से अपनी बात रखी। वे साफगोई की राजनीति में यकीन रखने वाले करिश्माई व्यक्तित्व हैं, जिनमें अपनी बात को प्रभावी एवं कठोर तरीके से रखने का विशेष गुण है। उनके लिए कोई देश दुश्मन नहीं है केवल प्रतिरोधी है। लेकिन इसके साथ ही रक्षा मंत्री ऐसे राजनीतिज्ञ, सर्तक एवं जागरूक भी थे जिन्होंने आधिकारिक रूप से चीनी सेनाओं के लद्दाख में नियन्त्रण रेखा के पार घुस आने की घटनाओं को देशवासियों के समक्ष रखा और चेताया कि हमारी फौजें यह स्थिति किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगी। अतः अब जबकि भारत की जांबाज फौजों ने लद्दाख के चुशूल सेक्टर और पेगोंग झील के दक्षिणी छोर पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है तो चीनी रक्षा मंत्री के सामने राजनाथ सिंह ने एक मजबूत छोर पर खड़े होकर बातचीत की है।

राजनाथ सिंह चतुर एवं प्रभावी राजनेता होने के साथ-साथ उदारवादी चिन्तन के वाहक हैं, उन्होंने चीन को चेता दिया है कि चीन यदि युद्ध चाहेगा तो भारत पीछे नहीं हटेगा और करारा जवाब देगा। लेकिन भारत की मानसिकता युद्ध की न पहले थी और न आज है। चीन के आक्रमणकारी तेवरों को निस्तेज करने के लिए भारत ने जो तैयारी की है वह शान्तिपूर्ण हल खोजने के लिए ही की है। भारत तो वह देश है जिसने पंचशील समझौता करके सहअस्तित्व एवं शांति का मार्ग प्रशस्त किया था, लेकिन चीन तब भी दोगला था और आज भी है। आज भी जिस तरह फौजी साजो-सामान की सीमा पर तैनाती कर रहा है उसके समानांतर भारत को भी अपनी तैयारियों को सशक्त एवं प्रभावी ढंग से अंजाम देना मजबूरी है। इसके बावजूद भारत का स्पष्ट मत है कि युद्ध किसी समस्या का अन्तिम हल नहीं हो सकता है। अन्ततः हल बातचीत की मेज पर बैठ कर ही निकलता है तो हम अनर्थ एवं विनाश के बाद मेज पर क्यों बैठें ? भले ही चीन ने 1962 में आक्रमण करके पंचशील समझौते को खंड-खंड किया और भारत की 40 हजार वर्ग कि.मी. अक्साई चिन की जमीन कब्जा ली, किन्तु चीन का अब ऐसा कोई इरादा किसी कीमत पर कामयाब नहीं हो सकता, चाहे वह कितने भी मनसूबे पाले, चाहे कितनी ही कुचेष्टाएं करें, चाहे कितने ही सैन्य एवं हथियारों का प्रदर्शन करे। अपने कामों को बखूबी और अंजाम तक पहुंचाने वाले राजनाथ ने पुरजोर तरीके से स्पष्ट किया है कि भारत तो आज भी शांति चाहता है, उसकी मंगल कामना तो यही है कि अब मनुष्य यंत्र-शस्त्र के बल पर नहीं, भावना और प्रेम के बल पर जीए और जीते ताकि जंग अब विश्व में नहीं, हथियारों में लगे।

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राजनाथ सिंह की रक्षा विषयक सक्रियता देश के हित में है। राजनाथ जैसे शीर्ष एवं अनुभवी राजनेताओं का विभिन्न रक्षा एवं देशहित के मोर्चों पर सक्रिय रहना न केवल पार्टी बल्कि देशहित में हैं। आपने ‘साल’ का वृक्ष देखा होगा- काफी ऊंचा ‘शील’ का वृक्ष भी देखें- जितना ऊंचा है उससे ज्यादा गहरा है। राजनाथ सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व में ऐसी ही ऊंचाई और गहराई है, इसी गहराई एवं ऊंचाई की सक्रियता का ही परिणाम है कि भारत के वीर सैनिकों ने पिछले दिनों सीमाओं पर चीनी फौजों के हौसले जिस तरह तोड़े उससे स्पष्ट है कि सामरिक मोर्चे पर भारत चीन के भारी फौजी जमावड़े को जमीन दिखाने के काबिल है। चीन को यह भलीभांति समझ लेना होगा कि यह दौर वास्तव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन का मजबूत दौर है और उसे 1962 की सपने की दुनिया से बाहर आकर यथार्थ को समझना होगा। अन्यथा चुशूल सेक्टर में भारतीय फौजों ने चीन का जो हश्र किया, उससे भी अधिक भयानक हश्र आगे होगा। भारत को वार्ताओं में उलझाये रख कर चीन यदि इस मुगालते में था कि वह मनमाने ढंग से नियन्त्रण रेखा की दशा और दिशा बदल सकता है तो उसके इस मनसूबे का करारा जवाब देकर भारत ने चीन को उसकी जमीन दिखा दी है। राजनाथ सिंह जैसे कद्दावर एवं साहसी रक्षा कवच के रहते अब चीन की ऐसी किसी भी कुचाल का सफल होना संभव नहीं है। राजनाथ सिंह केवल रक्षा मंत्री ही नहीं हैं, बल्कि वे देश की एक बड़ी ताकत हैं, वे एक कर्मयोद्धा की तरह सक्रिय होकर स्वयं को भारत के रक्षा नेता के रूप में प्रतिष्ठापित करते हुए भारत की शांतिप्रिय सशक्त योद्धा की छवि को दुनिया में विशेष दर्जा दिलाने एवं चीन को कमजोर करने की जमीन तैयार कर रहे हैं।

-ललित गर्ग

(लेखक, पत्रकार, स्तंभकार)

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