Ram Mandir Donation Controversy | वीएचपी ने Champat Rai के 'कार्यों' से बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- 'हमारा काम अब पूरा हुआ'

By रेनू तिवारी | Jun 30, 2026

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान के कथित गबन (चोरी) के आरोपों को लेकर देश की राजनीति और धार्मिक हलकों में मचे घमासान के बीच एक बड़ा मोड़ आ गया है। राम जन्मभूमि आंदोलन का दशकों तक नेतृत्व करने वाले संगठन विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के 'कार्यों' से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। वीएचपी के शीर्ष नेता आलोक कुमार ने एक विशेष साक्षात्कार में साफ किया कि मंदिर निर्माण का संकल्प पूरा होने के साथ ही इस पूरे मामले में संगठन की भूमिका समाप्त हो चुकी है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव का पद संभालने से पहले चंपत राय लंबे समय तक वीएचपी के फायरब्रांड नेता और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी रहे हैं। माना जाता है कि मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज और निर्माण को संभालने वाले इस महत्वपूर्ण ट्रस्ट में उन्हें शीर्ष स्थान दिलाने में वीएचपी की बड़ी भूमिका थी।

इस महीने की शुरुआत में मंदिर के दान में कथित हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद, चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इस विवाद पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई को दिए एक विशेष इंटरव्यू में वीएचपी नेता आलोक कुमार ने दोक टूक शब्दों में कहा: "मैं राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव के तौर पर श्री चंपत राय के कार्यों से खुद को अलग कर रहा हूं। मंदिर के गर्भगृह के निर्माण और भगवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही इस आंदोलन और व्यवस्था में विश्व हिंदू परिषद की जो भूमिका थी, वह अब समाप्त हो चुकी है।"

वीएचपी ने क्यों बनाई दूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और समर्पण से जुड़े राम मंदिर में दान की चोरी के आरोपों से विश्व हिंदू परिषद की छवि को भारी नुकसान पहुँच सकता था। यही कारण है कि संगठन ने डैमेज कंट्रोल (छवि सुधार) के तहत चंपत राय के फैसलों और व्यक्तिगत भूमिका से पल्ला झाड़ना ही बेहतर समझा।

आलोक कुमार के बयान से यह भी संकेत मिलते हैं कि वीएचपी अब ट्रस्ट के आंतरिक प्रशासनिक और वित्तीय फैसलों की जवाबदेही सीधे तौर पर पूर्व पदाधिकारियों पर ही छोड़ना चाहती है, न कि उसे संगठन के माथे मढ़ना चाहती है।

क्या है पूरा विवाद?

इसी महीने (जून 2026) अयोध्या राम मंदिर के खातों और दान राशि में भारी वित्तीय गड़बड़ी और कथित गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया था। विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और ट्रस्ट प्रबंधन पर तीखे हमले किए थे। चौतरफा दबाव और विवाद बढ़ता देख चंपत राय ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था, जिसके बाद से ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है।

राम मंदिर आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे चंपत राय से वीएचपी की इस दूरी ने अयोध्या की धार्मिक और राजनीतिक हलचल को एक नया मोड़ दे दिया है।

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