Ram Navami 2026: सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग में 26 मार्च को मनाई जाएगी रामनवमी

By डॉ अनीष व्यास | Mar 25, 2026

इस साल राम नवमी का पावन त्यौहार 26 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। भगवान श्रीराम का जन्म कर्क लग्न और अभिजीत मुहूर्त में मध्यान्ह 12 बजे हुआ था। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि राम नवमी इस साल 26 मार्च को मनाई जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च को सुबह 11:48 मिनट पर होगा। नवमी तिथि का समापन 27 मार्च 2026 को सुबह 10:06 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार भगवान राम का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को दोपहर में हुआ था। 26 मार्च को नवमी तिथि प्रातः 11:48 मिनट से शुरू हो रही है। इसीलिए राम नवमी का पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा । रामनवमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। जिससे इस दिन किए जाने वाले सभी शुभ कार्य सिद्ध होंगे। इसके अलावा, इस दिन रवि योग का निर्माण हो रहा है।

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श्री राम नवमी: 26 मार्च 2026 

ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि श्रीराम का जन्म मध्याह्न व्यापिनी चैत्रशुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था, अतः मध्याह्न व्यापिनी चैत्र शुक्ल नवमी को ही यह पर्व मनाया जाता है। पुनर्वसु युक्त मध्याह्न व्यापिनी नवमी में यह व्रत किया जाता है, परन्तु पुनर्वसु नक्षत्र इसमें निर्णायक नहीं है। 

चैत्रशुक्ल नवमी रामनवमी। अस्यां मध्याह्रव्यापिन्यामुपोषणं कार्यम् ।।  पूर्वेद्युरेव मध्याह्ने सत्त्वे सैव ग्राह्या।। शुद्धाया नवम्यां अलाभे मुहूर्त्तत्रयन्यूनत्वे वा सर्वैरप्यष्टमी विद्धैवोपोष्येत्याहुः ।। इदं व्रतं नित्यं काम्यं च ।। - धर्मसिन्धु

ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि 26 मार्च 2026 को मध्याह्न के समय नवमी आर्द्रा नक्षत्र से युक्त है। अतः यह व्रत इसी दिन किया जायेगा, इसमें पुनर्वसु नक्षत्र को निर्णायक नहीं माना गया है। 27 मार्च 2026 को नवमी मध्याह्नकाल को स्पर्श भी नहीं कर रही है। मध्याह्न काल 26 मार्च को लगभग 11:21 से दोपहर 01:46 तक रहेगा। अतः 26 मार्च 2026 को ही श्रीराम नवमी का व्रत किया जायेगा।

राम नवमी शुभ मुहूर्त 

भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च को सुबह 11:48 मिनट पर होगा। नवमी तिथि का समापन 27 मार्च 2026 को सुबह 10:06 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार भगवान राम का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को दोपहर में हुआ था। इसीलिए राम नवमी का पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा । 

राम नवमी पूजा समय 

भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि  मध्याह्न काल 26 मार्च को लगभग 11:21 से दोपहर 01:46 तक रहेगा।  मध्याह्न समय में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पूजा कर सकते हैं।

शुभ योग

कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि रामनवमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। जिससे इस दिन किए जाने वाले सभी शुभ कार्य सिद्ध होंगे। इसके अलावा, इस दिन रवि योग का निर्माण हो रहा है। जिसके अनुसार पूजा-अर्चना से आरोग्यता, स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी। इस अवसर पर शिववास योग का भी संयोग बन रहा है। जिससे साधकों पर भगवान श्रीराम और शिव की विशेष कृपा बरसेगी। रवि योग में सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है।

अनुष्ठान 

भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि सर्वार्थ सिद्धि योग में कोई भी जाप, अनुष्ठान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए यह अहम है। मकान, वाहन, सोने चांदी के जेवरात की खरीदारी, मुंडन, गृहप्रवेश आदि विशेष मांगलिक कार्य किए जाते हैं। 

पूजा विधि

भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि इस पावन दिन शुभ जल्दी उठ कर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहन लें। अपने घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। घर के मंदिर में देवी- देवताओं को स्नान कराने के बाद साफ स्वच्छ वस्त्र पहनाएं। भगवान राम की प्रतिमा या तस्वीर पर तुलसी का पत्ता और फूल अर्पित करें। भगवान को फल भी अर्पित करें। अगर आप व्रत कर सकते हैं, तो इस दिन व्रत भी रखें। भगवान को अपनी इच्छानुसार सात्विक चीजों का भोग लगाएं। इस पावन दिन भगवान राम की आरती भी अवश्य करें। आप रामचरितमानस, रामायण, श्री राम स्तुति और रामरक्षास्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। भगवान के नाम का जप करने का बहुत अधिक महत्व होता है। आप श्री राम जय राम जय जय राम या सिया राम जय राम जय जय राम का जप भी कर सकते हैं। राम नाम के जप में कोई विशेष नियम नहीं होता है, आप कहीं भी कभी भी राम नाम का जप कर सकते हैं।

हवन सामग्री

कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि आम की लकड़ी, आम के पत्ते, पीपल का तना, छाल, बेल, नीम, गूलर की छाल, चंदन की लकड़ी, अश्वगंधा, मुलैठी की जड़, कपूर, तिल, चावल, लौंग, गाय की घी, इलायची, शक्कर, नवग्रह की लकड़ी, पंचमेवा, जटाधारी नारियल, गोला और जौ आदि हवन में प्रयोग होने वाली सभी सामग्री जुटाएं।

हवन विधि

भविष्यवक्ता डॉ अनीष व्यास ने बताया कि हवन पर बैठने वाले व्यक्ति को रामनवमी के दिन प्रातः जल्दी उठना चाहिए। शौच आदि से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करने चाहिए। वैदिक शास्त्रों में ऐसा लिखा है कि यदि हवन पति-पत्नी साथ में करें तो उसका विशेष फल प्राप्त होता है। सबसे पहले किसी स्वच्छ स्थान पर हवन कुंड का निर्माण करें। हवन कुंड में आम लकड़ी और कपूर से अग्नि प्रज्जवलित करें। इसके बाद हवन कुंड में ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डयै विच्चै नमः का जाप करते हुए घी से माता के नाम की आहुति दें। इसी के साथ अन्य देवी-देवताओं के नाम की आहुति दें। इसके बाद संपूर्ण हवन सामग्री से 108 बार हवन सामग्री को आहुति दें।

हवन के बाद करें यह कार्य

हवन के बाद माता जी की आरती करें। इसके बाद माता को खीर, हलवा, पूड़ी और चने का भोग लगाएं। कन्याओं को भी भोजन कराएं। प्रसाद बांटें। उन्हें दक्षिणा भी दें।

राम नवमी का महत्व

कुंडली विश्लेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि राम नवमी का दिन भक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि यह दिन भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विष्णु जी के अवतार प्रभु श्री राम की पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। भक्तों के जीवन से सभी कष्ट कट जाते हैं। इसके अलावा इस दिन नवरात्रि का समापन भी होता है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन को महानवमी कहते हैं। इस दिन पूजा अर्चना करने से राम जी के साथ आदिशक्ति मां जगदम्बा की कृपा भी प्राप्त होती है।

- डा. अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

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