भूपेश बघेल पर रमन सिंह का निशाना, छत्तीसगढ़ अय्याशी का अड्डा नहीं, झारखंड के MLAs को दारू-मुर्गा खिला रहे

By अंकित सिंह | Aug 30, 2022

झारखंड में सियासी हलचल तेज है। सरकार बचाने में जुटी यूपीए अपने विधायकों को झारखंड से छत्तीसगढ़ शिफ्ट कर चुकी है। हेमंत सोरेन का आरोप है कि उनके विधायकों को भाजपा तोड़ने की कोशिश कर रही है। दरअसल, हेमंत सोरेन पर लाभ के पद मामले में स्थिति की तलवार लटकी हुई है। ऐसे में कहीं न कहीं सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यही कारण है कि कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए रांची से रायपुर शिफ्ट कर चुकी है। कुछ देर पहले ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधायकों से मुलाकात की है। इन सबके बीच रमन सिंह जो कि पूर्व मुख्यमंत्री हैं, छत्तीसगढ़ के उन्होंने भूपेश बघेल पर निशाना साधा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि भूपेश बघेल की सरकार झारखंड के विधायकों को दारु मुर्गा खिला रही है। इसके साथ ही उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया है। 

 

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कुल मिलाकर देखें तो झारखंड की सियासत को लेकर अब छत्तीसगढ़ की राजनीति काफी तेज हो चुकी है। अपने ट्वीट में रमन सिंह ने लिखा कि भूपेश जी कान खोलकर सुन लीजिए! छत्तीसगढ़ अय्याशी का अड्डा नहीं है, जो छत्तीसगढ़ियों के पैसे से झारखंड के विधायकों को दारू-मुर्गा खिला रहे हैं। असम, हरियाणा के बाद अब झारखंड के विधायको का डेरा, इन अनैतिक कार्यों के लिए। छत्तीसगढ़ महतारी आपको कभी माफ नहीं करेगी। करीब 40 विधायकों को लेकर एक विशेष उड़ान शाम करीब साढ़े चार बजे रांची हवाई अड्डे से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के लिए रवाना हुई। उड़ान करीब 5.30 बजे रायपुर हवाई अड्डे पर पहुंची। इक्यासी सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के 49 विधायक हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हवाई अड्डे से बाहर आने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह आश्चर्यजनक कदम नहीं है। यह राजनीति में होता है। हम किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।’’

 

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विधायक सोरेन के आवास से दो बसों में निकले और उनमें से एक बस में आगे की सीट पर खुद सोरेन सवार थे। वह बिरसा मुंडा हवाई अड्डे में कुछ देर रहने के बाद बाहर आए। लाभ के पद के मामले में सोरेन को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने की भाजपा की याचिका के बाद, निर्वाचन आयोग ने 25 अगस्त को राज्य के राज्यपाल रमेश बैस को अपना फैसला भेज दिया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग के फैसले को अभी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन चर्चा है कि निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री को विधायक के रूप में अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की है। राजभवन ने इस मामले में अभी तक कुछ भी घोषणा नहीं की है। संप्रग विधायकों ने राज्यपाल से इस भ्रम को दूर करने का अनुरोध करते हुए कहा है कि वे किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। 

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