By अनन्या मिश्रा | Sep 17, 2026
तमिलनाडु के रामानाथपुरम जिले के रामेश्वरम में रामेश्वर मंदिर स्थित है। रामेश्वरम मंदिर 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से 11वें नंबर पर आता है। रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम द्वीप पर बसा है। जो उत्तर भारत में काशी की मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम की भी है। रामेश्वरम को दक्षिण भारत का काशी भी कहा जाता है। वहीं रामेश्वरम को रामनाथस्वामी मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर अपनी भव्य संरचना, जटिल मूर्तिकला, विशाल मीनारों और गलियारों के लिए जाना जाता है। वहीं मंदिर में पूजे जाने के भगवान लिंग के रूप में विराजमान हैं।
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बता दें कि यह मंदिर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित और भगवान भोलेनाथ की पूजा को समर्पित ज्योतिर्लिंग है। यह जगह भगवान विष्णु और महादेव के भक्तों के लिए बेहद खास मानी जाती है। वहीं रामेश्वर ज्योतिर्लिंग हिंदू धर्म में 4 प्रमुख स्थलों में भी शामिल है।
मंदिर की वर्तमान संरचना का निर्माण 17वीं शताब्दी में भारत के राजाओं ने कराया था। इसमें श्रीलंका के राजाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा था। माना जाता है कि भारत के सभी हिंदू मंदिरों की तुलना में रामेश्वरम मंदिर का गलियारा काफी ज्यादा लंबा है। वहीं इसके कुछ हिस्से हजारों साल पुराने बताए गए थे। लेकिन रामेश्वरम मंदिर का संबंध रामायण काल से है।
इस मंदिर से जुड़ी कथाओं और भारतीय महाकाव्य रामायण के मुताबिक भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय हासिल करने के बाद प्रायश्चित के लिए महादेव की पूजा करने की सोचा। इसके लिए उन्होंने हनुमान को काशी से शिवलिंग लाने का अनुरोध किया।
जब हनुमान जी ने शिवलिंग को लाने में देरी की, तो माता सीता ने रेत से शिवलिंग बनाया, जिससे कि श्रीराम भगवान शिव की पूजा कर सकें। माना जाता है कि यह वहीं शिवलिंग है, जिसको रामलिंगम के नाम से भी जाना जाता है। जो अब रामनाथस्वामी में पूजा जाता है। वहीं काशी से हनुमान जी द्वारा लाए गए शिवलिंग को विश्वलिंगम कहते हैं।
वहीं इस मंदिर के अंदर 22 तीर्थम यानी की पवित्र जल निकाय हैं, जहां पर भक्त अपने पापों के प्रायश्चित के लिए नहाते हैं।