Lord Shiva की मानस पुत्री और नागराज वासुकी की बहन कैसे बनीं Mansa Devi

देवी मनसा को नागों की देवी कहा जाता है। मनसा देवी का भगवान शिव से गहरा रिश्ता है। हालांकि देवी मनसा के जन्म और भगवान शिव से उनके संबंध को लेकर अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों में विभिन्न कथाएं मिलती हैं।
हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी ही एक मनसा देवी हैं, जिनको नागों की देवी कहा जाता है। मनसा देवी का भगवान शिव से गहरा रिश्ता है। हालांकि देवी मनसा के जन्म और भगवान शिव से उनके संबंध को लेकर अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों में विभिन्न कथाएं मिलती हैं। लेकिन इसका विस्तृत विवरण ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खंड के अध्याय 45 और 46 में मिलता है। इस पुराण में देवी मनसा का भगवान शिव के साथ क्या संबंध है, इस बात का जिक्र मिलता है। तो आइए जानते हैं देवी मनसा के जन्म की पौराणिक कथा और महादेव से उनके संबंध के बारे में...
भगवान शिव की मानस पुत्री हैं मनसा देवी
पौराणिक मान्यता के मुताबिक देवी मनसा को महादेव की मानस पुत्री कहा जाता है। मानस पुत्री का अर्थ ऐसी संतान से है, जिसका जन्म शारीरिक प्रक्रिया से न होकर मन के संकल्प से हुआ हो। इसके पीछे एक कथा सुनने को मिलती है, जिसमें इस बात का उल्लेख मिलता है कि देवी मनसा का जन्म कैसा हुआ था। धार्मिक मान्यता के मुताबिक देवी मनसा को भगवान भोलेनाथ की पुत्री और नागराज वासुकी की बहन कहा जाता है।
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देवी मनसा के जन्म की कथा
कथा के मुताबिक जब भगवान शिव ध्यान में लीन थे, तो उनको मां पार्वती के मनोहर स्वरूप का अनुभव हुआ। इस अनुभव से उनका वीर्य जमीन पर गिरा और देवी मनसा का जन्म हुआ। देवी मनसा का जन्म होने के बाद नागों और सर्पियों ने उनकी रक्षा की। वासुकी नाग ने देवी रो अपनी पुत्री की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया। धीरे-धीरे वह एक दिव्य और सुंदर नाग कन्या के रूप में प्रकट हुईं, जिनको आगे जाकर मनसा देवी के नाम से जाना गया।
महादेव ने पुत्री के रूप में किया स्वीकार
जब देवी मनसा बड़ी हुईं, तो वासुकी नाग के उनको बताया कि वह भोलेनाथ की पुत्री हैं और वासुकी उनको भोलेनाथ के पास ले गए। जब महादेव ने देवी को देखा, तो उनको अपनी मानस पुत्री के रूप में स्वीकार कर लिया।
माता पार्वती ने क्यों दिया था श्राप
श्रीमद् देवीभागवत पुराण के स्कंध 9 और अध्याय 48 में इसका जिक्र मिलता है। इन ग्रंथों में बताया गया कि जब देवी पार्वती ने मां मनसा को देखा, तो भगवान शिव और उनके बीच विवाद हो गया। क्योंकि मनसा देवी को देवी पार्वती अपनी सौतेली पुत्री मानती थीं। क्योंकि भगवान शिव के मन से देवी मनसा का जन्म हुआ था, इसलिए मां पार्वती के लिए उनको अपनाना आसान नहीं था। इसलिए उन्होंने देवी मनसा को श्राप दे दिया कि उनकी पूजा हमेशा अधूरी मानी जाएगी।
बता दें कि मनसा देवी को विषहरी माता के नाम से भी जाना जाता है। वहीं इनकी पूजा में दाएं हाथ की जगह बाएं हाथ का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं हिंदू धर्म में बाएं हाथ से की गई पूजा को अधूरा माना जाता है।
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