By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 10, 2021
लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को व्यवस्था दी कि बलात्कार के मामले में पीड़िता को उसके बच्चे के पिता का पता लगाने के लिए डीएनए परीक्षण से गुजरने को मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने इसके साथ ही बलात्कार के नाबालिग आरोपी की याचिका पर पॉक्सो अदालत द्वारा पीड़िता के बच्चे का डीएनए परीक्षण कराने के आदेश को दरकिनार कर दिया। न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा की पीठ ने आरोपी की याचिका के विरुद्ध दायर पुनरीक्षण याचिका को अनुमति देते हुए यह आदेश पारित किया। उन्होंने कहा कि पॉक्सो अदालत के सामने सवाल यह था कि क्या जिस अभियुक्त के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया उसने वाकई बलात्कार किया था। न कि यह पता लगाना कि उस वारदात के परिणामस्वरूप पैदा हुए बच्चे का पिता कौन है।