By अनन्या मिश्रा | Feb 13, 2026
आज यानी की 13 फरवरी 2026 को कुंभ संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। इस संक्रांति के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। इसके साथ ही सूर्य देव की पूजा-आराधना और दान-पुण्य करते हैं। साल 2026 में कुंभ संक्रांति के मौके पर विजया एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जिससे इस पर्व का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। कुंभ संक्रांति के मौके पर स्नान-दान और पूजा आदि करना बेहद शुभ माना जाता है। तो आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त, शुभ योग और पूजन विधि के बारे में...
कुंभ संक्रांति के मौके पर सुबह 07:01 मिनट से लेकर दोपहर 12:35 मिनट तक पुण्यकाल रहेगा। वहीं सुबह 07:01 मिनट से लेकर सुबह 08:53 मिनट तक महापुण्यकाल रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि महापुण्य में गंगा या फिर किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है। आज पुण्य क्षण सुबह 04:14 मिनट पर रहेगा।
इस साल कुंभ संक्रांति पर शिववास और सौभाग्य योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही पूर्वाषाढ़ा और मूल नक्षत्र का भी विशेष संयोग है। इन शुभ योग में भगवान श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है और जातक की मनोकामना पूरी होती है।
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि यानी की 13 फरवरी 2026 को सूर्य देव राशि परिवर्तन करेंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक सुबह 04:04 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इस गोचर के साथ ही कुंभ संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। सूर्य देव कुंभ राशि में करीब 1 महीने तक विराजमान रहेंगे।
कुंभ संक्रांति के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करें। स्नान के बाद ही भोजन करना चाहिए। अगर आप किसी वजह से पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर नहाते समय जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इस दिन दान का विशेष महत्व होता है, इसलिए किसी भी भिखारी या जरूरतमंद को खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए। ऐसा करने से जातक पर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है और जीवन में पॉजिटिविटी आती है।