Prabhasakshi NewsRoom: भारत ने P8I Aircraft की खरीद रोक कर उड़ा दिये थे अमेरिकी रक्षा कंपनियों के होश, अब ऑर्डर मिलने से US में खुशी का माहौल

By नीरज कुमार दुबे | Feb 13, 2026

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान रक्षा खरीद परिषद ने कई बड़े फैसले लेकर यह संदेश दे दिया है कि देश अपनी वायु और समुद्री ताकत को तेज रफ्तार से बढ़ाने जा रहा है। एक ओर लड़ाकू विमानों की नई खेप को मंजूरी मिली है, तो दूसरी ओर नौसेना के लिए लंबी दूरी तक नजर और वार करने वाले P-8I समुद्री गश्ती विमानों की राह खुली है। हम आपको बता दें कि P-8I विमान खेल युद्ध के मैदान में बदल देने में माहिर हैं। यह विमान लंबी दूरी की समुद्री टोह, पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री प्रहार में माहिर माने जाते हैं। समुद्र की सतह के ऊपर ही नहीं, उसके नीचे छिपे खतरे पर भी इनकी पैनी नजर रहती है। दुश्मन पनडुब्बी की हलचल पकड़ना, जहाजों की गतिविधि पर नजर रखना, संकट के समय त्वरित प्रहार करना, ये सब इसकी क्षमता का हिस्सा है। भारतीय नौसेना पहले से ऐसे 12 विमान चला रही है, जिन्होंने हजारों घंटे बिना किसी बड़े हादसे के उड़ान भर कर अपनी उपयोगिता साबित की है। एक दशक से अधिक सेवा के बाद भी इनका प्रदर्शन भरोसेमंद रहा है।

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जहां तक भारत और अमेरिका के रक्षा संबंधों की बात है तो निश्चित रूप से यह गहरे हो रहे हैं। कभी यह रिश्ता केवल खरीदार और विक्रेता तक सीमित था, अब वह साझा तैयारी, साझा अभ्यास और तकनीकी सहयोग तक पहुंच गया है। सुरक्षित संचार, सूचनाओं का आदान-प्रदान और समुद्री क्षेत्र में तालमेल के लिए दोनों ने कई आधारभूत समझौते किए हैं। अब जोर केवल खरीद पर नहीं, बल्कि संयुक्त उत्पादन और तकनीकी साझेदारी पर भी है, ताकि दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता बढ़े।

दिलचस्प मोड़ तब आया था जब पिछले साल अमेरिका ने भारत पर ऊंचे शुल्क लगा दिए थे। उस समय भारत ने P-8I की खरीद पर चर्चा रोक दी थी। इस कदम ने अमेरिकी रक्षा कंपनियों को साफ संकेत दिया कि भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। बताया जाता है कि उस दौरान अमेरिकी रक्षा कंपनियों की बेचैनी बढ़ गई थी। अब जब व्यापारिक खटास काफी हद तक कम हुई और भारत से फिर खरीद की मंजूरी मिली, तो अमेरिकी पक्ष में उत्साह का माहौल है। वहां यह भी खुल कर कहा जा रहा है कि भारत को मजबूत बनाना उसके लिए भी फायदेमंद है और इससे उनके यहां रोजगार भी बढ़ते हैं। साफ है कि रक्षा सौदे अब सामरिक और आर्थिक दोनों तराजू पर तोले जा रहे हैं।

हम आपको यह भी बता दें कि एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ संकेत दिया है कि वाशिंगटन भारत को होने वाली रक्षा बिक्री और बढ़ाने की तैयारी में है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग की रफ्तार लगातार तेज रहने का संदेश मिलता है। दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक सचिव एस पॉल कपूर ने संसदीय सुनवाई के दौरान कहा कि कई हथियार प्रणालियों की अतिरिक्त खरीद की योजनाएं आगे बढ़ रही हैं, जो भारत की अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की क्षमता को मजबूत करेंगी और साथ ही अमेरिका के रक्षा क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ाएंगी। उनका कहना था कि व्यापार को लेकर पहले जो अनिश्चितताएं थीं, उनके बावजूद रक्षा सहयोग की गति बनी रही और अब व्यापार विवाद काफी हद तक सुलझ जाने से यह और तेज होगी।

इसी बढ़ते तालमेल की झलक संयुक्त सैन्य अभ्यास वज्र प्रहार में भी दिखेगी, जो हिमाचल प्रदेश के बकलोह में होने जा रहा है। दोनों देशों की विशेष बल इकाइयां आतंकवाद रोधी अभियान, पहाड़ी युद्ध, हवाई उतराई, जल मार्ग से घुसपैठ और बचाव अभियान जैसे कठिन अभ्यास साथ करेंगी। हम आपको बता दें कि बकलोह जैसा कठिन पहाड़ी इलाका इस तरह की तैयारी के लिए उपयुक्त माना जाता है, जहां अभ्यास लगभग वास्तविक हालात जैसा होता है।

देखा जाये तो बदलते वैश्विक परिदृश्य में संदेश एकदम स्पष्ट है। भारत अपनी समुद्री सीमा, आकाश और भूभाग की रक्षा के लिए अब आधे उपायों पर भरोसा नहीं करेगा। P-8I जैसे विमान केवल मशीन नहीं, बल्कि आंख, कान और जरूरत पड़ने पर मुक्का भी हैं। अमेरिका के साथ बढ़ती नजदीकी केवल दोस्ती की कहानी नहीं, बल्कि हितों के मेल की कहानी है। जहां हित मिलते हैं, वहीं साझेदारी टिकती है। भारत अब यही कर रहा है, अपने हितों के आधार पर रिश्ते गढ़ रहा है, ताकत बढ़ा रहा है और यह जता रहा है कि हिंद महासागर हो या हिमालय की चोटियां, भारत तैयार है, सतर्क है और जरूरत पड़ी तो सख्त जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।

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