Ram Temple Ayodhya: वो रथयात्रा जिसकी धूल लोग सर से लगाते थे…92 के अहम किरदार प्राण प्रतिष्ठा में क्यों नहीं होंगे शामिल

By अभिनय आकाश | Dec 19, 2023

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर ट्रस्ट ने लगभग सभी तैयारियों कर ली हैं। 1990 के दशक में रथयात्रा की ही तरह एक और रथयात्रा गुजरात से 8 जनवरी को रामनगरी अयोध्या के लिए निकलेगी। रथयात्रा गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के शहरों से होते हुए 1400 किमी तय करेगी। इससे पहले 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के अगुआ रहे बीजेपी के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के स्वास्थ्य व उम्र संबंधी कारणों से अगले महीने होने वाले मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होने की संभावना है। 1990 के दशक में अपने करियर के चरम पर लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक 'रथ यात्रा' का नेतृत्व किया। जुलूस कभी अयोध्या नहीं पहुंचा, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी का नाम राम मंदिर मुद्दे से अविभाज्य रूप से जुड़ा हुआ था। रथ यात्रा अयोध्या में विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लालकृष्ण आडवाणी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित एक राजनीतिक और धार्मिक जुलूस था।

रथ यात्रा 25 सितंबर, 1990 को शुरू हुई। पूरी यात्रा के दौरान आडवाणी ने एक रथ में यात्रा की रास्ते में भारी भीड़ को संबोधित किया और राम मंदिर के निर्माण की वकालत की। हालाँकि, जैसे-जैसे यह आगे बढ़ा, इसे बाधाओं का सामना करना पड़ा। तनाव बढ़ गया, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा हुई। यात्रा अंततः बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा रोक दी गई, जिन्होंने आगे सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया।

धार्मिकता से प्रेरित नहीं थी भागीदारी 

6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। वर्षों से आडवाणी का नाम राम रथ यात्रा और राम जन्मभूमि आंदोलन से निकटता से जुड़ा हुआ है। 2004 में एक बयान में आडवाणी ने कहा कि भाजपा के लिए राम जन्मभूमि आंदोलन में भागीदारी धार्मिकता से प्रेरित नहीं थी। हम तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दोहरेपन और दोहरे मानदंडों से नाराज थे और इस अवसर का उपयोग भारत में धर्मनिरपेक्षता पर एक बहुत जरूरी बहस शुरू करने के लिए किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या आंदोलन हिंदू समाज को विरोधी जातिगत आधार पर विभाजित करने के प्रयासों के लिए एक बहुत प्रभावी मारक साबित हुआ।

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राम मंदिर को लेकर आडवाणी के बायन 

2004 में एक बयान में आडवाणी ने कहा था कि भाजपा के लिए राम जन्मभूमि आंदोलन में भागीदारी धार्मिकता से प्रेरित नहीं थी। हम तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दोहरेपन और दोहरे मानदंडों से नाराज थे और इस अवसर का उपयोग भारत में धर्मनिरपेक्षता पर एक बहुत जरूरी बहस शुरू करने के लिए किया। मेरा मानना ​​​​है कि जिसे हम छद्म धर्मनिरपेक्षता कहते हैं, उस पर हमारा निरंतर हमला एक बहुत जरूरी सुधारात्मक साबित हुआ है। इसने धार्मिक समुदायों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर समतापूर्ण दृष्टिकोण के लिए बुनियादी नियम निर्धारित किए। 

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