Ratha Saptami 2026: 24 या 25 जनवरी? जानें सूर्य पूजा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि

By दिव्यांशी भदौरिया | Jan 20, 2026

हिंदू धर्म व्रत-तिथियों का बेहद महत्व माना जाता है। माघ महीने में पड़ने वाली इस सप्तमी तिथि का महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में सूर्य देवता की पहली किरण इसी तिथि को पृथ्वी तिथि पर आई थी। रथ सप्तमी को माघी सप्तमी, महती सप्तमी, सप्त सप्तमी, पुत्र सप्तमी आदि के नाम से भी जाना जाता है। सूर्यदेव का अवतरण भी इस दिन हुआ था। रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है। इसके साथ ही, मनुष्य को उत्तम लोक में स्थान मिलता है। आइए आपको बताते हैं कब रथ सप्तमी? शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र।


रथ सप्तमी 2026 कब है ?


हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का आरंभ 24 जनवरी शनिवार को रात में 12 बजकर 40 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन 25 जनवरी, रविवार को रात में 11 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, रथ सप्तमी को 25 जनवरी को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन स्नान, दान, व्रत और सूर्य देव की पूजा करना शास्त्र शुभ माना जाता है। इस बार सप्तमी को बेहद खास भी माना जा रहा हैं क्योंकि इस दिन सूर्य जयंती होने के साथ ही रविवार का दिन पड़ रहा है, जो सूर्य देवता को समर्पित माना जाता है।


रथ सप्तमी 2026 स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त


माघ माह की सप्तमी तिथि के दिन स्नान के लिए सर्वोत्तम समय सुबह 5:32 बजे से 7:12 बजे तक माना गया है। वहीं रथ सप्तमी के अवसर पर सूर्य देव की पूजा, दान और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इस समय में किए गए पूजन को विशेष फलदायी बताया गया है।


जानें रथ सप्तमी पूजा विधि और मंत्र


  - माघी सप्तमी को सूर्योदय के बाद स्नान करना चाहिए। इसके बाद आक के सात पत्तों और बेर के सात पत्तों को कसुम्भा की बत्ती वाले तिल-तेल पूर्ण दीपक में रखकर उसे सिर पर रख लें। इसके बाद ही सूर्य देवता का ध्यान करते हुए गन्ने से जल को हिलाकर दीपक बहते जल में प्रवाहित कर दें।


 - दीपक को बहाने से पहले 'नमस्ते रुद्ररूपाय रसानां पतये नमः। वरुणाय नमस्तेऽस्तु' मंत्र बोलकर दीपक को पानी में बहा दें। फिर 'यद् यज्जन्मकृतं पापं यच्च जन्मान्तरार्जितम। मनोवाक्कायर्ज यच्च ज्ञाताज्ञाते च ये पुनः, इति सप्तविधं पापं स्नानान्ते सप्तसप्तिके। सप्तव्याधिसमाकीर्णं हर भास्करि सप्तमि।' इन मंत्र का जाप करते हुए केशव और सूर्य को देखकर गंगाजल अथवा चरणामृत को जल में डालकर स्नान करने से पाप दूर हो जाते हैं।


 - सूर्य देव को जल देने के लिए अक्षत, पुष्प, दूर्वा, जल, गन्ध, सात आक के पत्ते और बदरी पत्र रखकर 'सप्तसप्तिवह प्रीत सप्तलोकप्रदीपन, सप्तम्या सहितो देव गृहाणार्घ्य दिवाकर।' से सूर्य को और 'जननी सर्वलोकानां सप्तमी सप्तसप्तिके, सप्तव्याहृतिके देवि नमस्ते सूर्यमण्डले।' से सप्तमी को अर्घ्य देना चाहिए।


 - सप्तमी तिथि के दिन निमित्त प्रातः स्नान आदि से बाद, यदि पास में सूर्य मंदिर हो तो उसके सामने बैठे अथवा सुवर्णादि की छोटी मूर्ति हो तो उसे अष्टदल कमल के बीच स्थापित करके 'ममाखिलकामना-सिद्ध्यर्थे सूर्यनारायणप्रीतये च सूर्यपूजनं करिष्ये।' से संकल्प करके 'ओम सूर्याय नमः' इस नाम मंत्र से अथवा पुरुष सूक्तादि से आवाहनादि षोडशोपचार पूजन करें।


 - इसी सप्तमी पर व्रत रखकर सूर्य का पूजन करके उनको रथ में स्थापित करें और प्रत्येक शुक्ल सप्तमी को पूजन करके वर्ष के अंत में ब्राह्मण को दें। माना जाता है कि इस तिथि पर सूर्य देव की पूजा करके उपवास करने से सात जन्म के पाप दूर हो जाएंगे। 

प्रमुख खबरें

ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर नियमन होना चाहिए: अनंत विजय

चीन के साथ मिलकर भारत विरोधी चाल चल रहे बांग्लादेश को ट्रंप ने लगाया डंडा

IRCTC का शानदार Ooty Tour Package, अब Budget में घूम सकेंगे पहाड़ों की रानी, जानें पूरा खर्च

Urban Naxal पर Congress का PM Modi से सीधा सवाल- क्या आपके हर विरोधी शहरी नक्सली हैं?