By प्रेस विज्ञप्ति | Jan 20, 2026
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा रविवार को नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में 'ओटीटी प्लेटफॉर्म की सामग्री का नियमन' विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।
परिचर्चा में अपने विचार रखते हुए 'ओवर द टॉप का मायाजाल' पुस्तक के लेखक एवं समीक्षक अनंत विजय ने कहा कि ओवर द टॉप यानी ओटीटी पर जिस तरह की सामग्री परोसी जा रही है, इसे लेकर लंबे समय से चर्चा हो रही है। अच्छी बात है कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद् इस विषय पर परिचर्चा आयोजित कर रही है।
उन्होंने कहा कि सिनेमा से ज्यादा बड़ा फलक ओटीटी का हो गया है। इस माध्यम में कुछ अच्छी कहानियां दिखाई जा रही हैं, लेकिन अनेक कहानियों में प्रस्तुत भगवान का उपहास उड़ाने की प्रवृत्ति, सेना और सैनिकों की छवि खराब करने जैसे प्रसंग, गाली-गलौज, यौनिकता, नग्नता, हिंसा से भरे कंटेट चिंता का विषय है और उस पर कहीं न कहीं अंकुश लगाने की आवश्यकता है। मेरा मानना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर नियमन होना चाहिए। सरकार पर इसे लेकर बहुत दबाव है और वह विचार कर रही है। हालांकि इसके लिए काफी संसाधनों की आवश्यकता होगी।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. कार्यालय मंत्री संजीव सिन्हा ने संस्था परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि परिषद् भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों की संस्था है। 1966 ई. में स्थापित इस संस्था के संस्थापक अध्यक्ष महान साहित्यकार जैनेंद्र कुमार थे।
'साहित्य परिक्रमा' पत्रिका प्रबंधक रजनी मान ने परिषद् के रीवा राष्ट्रीय अधिवेशन में 'ओटीटी प्लेटफॉर्म की सामग्री का नियमन' विषय पर पारित प्रस्ताव का पाठ प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म एवं गेमिंग एप्स पर प्रसारित होनेवाली प्रत्येक सामग्री के परीक्षण, नियमन और वर्गीकरण हेतु शासन द्वारा एक सशक्त, स्वायत्त विधायी नियामक संस्था का गठन किया जाए।
परिचर्चा का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती, आरके पुरम विभाग के अध्यक्ष एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक मलखान सिंह ने किया। कार्यक्रम के संयोजक मुन्ना रजक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. कार्यकारिणी सदस्य प्रवीण आर्य, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष विनोद बब्बर, उपाध्यक्ष मनोज शर्मा एवं ममता वालिया, संयुक्त महामंत्री बृजेश गर्ग, मंत्री सुनीता बुग्गा एवं राकेश कुमार, जगदीश सिंह, नरेन्द्र मिश्र, अखिलेश द्विवेदी, नवीन नीरज, जितेन्द्र कालरा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।