डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए RBI ने उठाया बड़ा कदम, रुपये में वैश्विक व्यापार, जीडीपी अनुमान बढ़ा और महंगाई कम होगी

By रेनू तिवारी | Oct 01, 2025

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार (1 अक्टूबर) को सीमा पार व्यापार के लिए भारतीय रुपये (आईएनआर) के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की, जिसमें बैंकों को द्विपक्षीय व्यापार लेनदेन के लिए भूटान, नेपाल और श्रीलंका के गैर-निवासियों को भारतीय रुपये में ऋण देने की अनुमति देना शामिल है। इसके तहत बैंकों को भूटान, नेपाल और श्रीलंका के प्रवासी नागरिकों को द्विपक्षीय व्यापार के लिए भारतीय रुपये में ऋण देने की अनुमति दी गई है। गौरतलब है कि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भारतीय रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि अधिकृत डीलर बैंकों को सीमा पार व्यापार लेनदेन के लिए भूटान, नेपाल और श्रीलंका के प्रवासी नागरिकों को भारतीय रुपये में ऋण देने की अनुमति दी गई है।

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एसआरवीए एक विदेशी बैंक द्वारा भारतीय बैंक के साथ खोला गया खाता है, जो सीधे भारतीय रुपये (आईएनआर) में अंतरराष्ट्रीय व्यापार निपटान की सुविधा देता है। ये उपाय अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे और इस प्रकार अर्थव्यवस्था को अचानक विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और मुद्रा संकट से बचाएंगे। ये कदम विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम करने और चालू खाता घाटे को एक आरामदायक स्तर पर रखने में मदद करेंगे।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और केंद्रीय बैंक बाह्य दायित्वों को आसानी से पूरा करने के लिए आश्वस्त है। उन्होंने कहा कि आरबीआई रुपये की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाएगा।

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इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने वृद्धि अनुमान को बुधवार को संशोधित कर 6.8 प्रतिशत कर दिया। साथ ही सामान्य से बेहतर मानसून एवं जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के आधार पर मुद्रास्फीति के अनुमान को घटाकर 2.6 प्रतिशत किया है। केंद्रीय बैंक ने अगस्त में 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडपी) की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत और मुद्रास्फीति के 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के बीच घरेलू मोर्चे पर महत्वपूर्ण घटनाक्रमों ने भारत में वृद्धि-मुद्रास्फीति की स्थिति को लेकर विचार को बदल दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ अच्छे मानसून के साथ, भारत की अर्थव्यवस्थाआर्थिक वृद्धि दर 2025-26 की पहली तिमाही में बेहतर रही और कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन मजबूत रहा। साथ ही खुदरा मुद्रास्फीति में भी उल्लेखनीय कमी आई है।’’ माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों को युक्तिसंगत बनाने के बारे में उन्होंने कहा कि इससे मुद्रास्फीति पर नरमी का प्रभाव पड़ने की संभावना है, साथ ही उपभोग और वृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा। गवर्नर ने कहा कि हालांकि अमेरिकी शुल्क से निर्यात में नरमी आएगी।  

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