By Ankit Jaiswal | Jun 10, 2026
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय क्षेत्र में निगरानी और अनुपालन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 135 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद ये कंपनियां अब गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान के रूप में काम नहीं कर सकेंगी।
गौरतलब है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां देश की वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। ये संस्थाएं ऋण वितरण, निवेश, वाहन वित्तपोषण और अन्य वित्तीय सेवाओं के माध्यम से लाखों ग्राहकों तक पहुंचती हैं। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर इनके संचालन और नियमों के पालन की समीक्षा करता रहता है।
बता दें कि जिन 135 कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए गए हैं, उनमें से बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल में पंजीकृत थी। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने इस कार्रवाई के पीछे प्रत्येक कंपनी के अलग-अलग कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया है, लेकिन यह कदम नियामकीय निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी के साथ भारतीय रिजर्व बैंक ने यह भी जानकारी दी है कि 13 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने स्वेच्छा से अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस कर दिए हैं। इन कंपनियों ने या तो इस कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया है या फिर विलय, समामेलन, विघटन अथवा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के कारण उनका अस्तित्व समाप्त हो गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार जे. थॉमस फाइनेंस, इकोन-सुपर सेल्स, हितेशा फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट, तिरुनेलवेली तूतीकोरिन इन्वेस्टमेंट्स, कार्नेक्स विनिमय और इम्पैक्ट लीजिंग जैसी कंपनियों ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कारोबार से बाहर निकलने के कारण अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस किए हैं।
वहीं फोररनर कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स ने भी अपना पंजीकरण वापस कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार यह कंपनी अब ऐसी निवेश कंपनी की श्रेणी में आती है जिसे अलग से पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए उसने स्वेच्छा से अपना लाइसेंस केंद्रीय बैंक को लौटा दिया है।
गौरतलब है कि कुछ अन्य कंपनियों ने भी विलय या कानूनी पुनर्गठन की वजह से अपने पंजीकरण समाप्त कर दिए हैं। इनमें कैस्पियन इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट्स, हरि दर्शन सेल्स, आइवरी कंसल्टेंट्स, एसकेए कंसल्टेंसी सर्विसेज, तृषिता मैनेजमेंट और सुबन ट्रेड्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों का स्वतंत्र कानूनी अस्तित्व समाप्त हो चुका है, जिसके कारण इनके पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की यह कार्रवाई वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाया है ताकि ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बता दें कि देश में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि इनके लिए नियामकीय मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि नियमों और अनुपालन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जा रहा है।