By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 28, 2026
मुंबई, 28 जुलाई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बढ़ती मुद्रास्फीति के बावजूद अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को यथावत रख सकता है। मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह से रुपये को लेकर चिंताएं कम हुई हैं जिससे केंद्रीय बैंक को तटस्थ रुख बनाए रखने की गुंजाइश मिली है। ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज की एक रिपोर्ट में यह बात की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ हमारा मानना है कि इस अस्थिरता के दौर में सबसे बेहतर कदम कुछ नहीं करना है।’’ मुद्रास्फीति में हाल में आई तेजी के बावजूद बार्कलेज का मानना है कि नीति-निर्माता तत्काल प्रतिक्रिया नहीं देंगे और फिलहाल ब्याज दर बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। रिपोर्ट में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की उस हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा गया जिसमें उन्होंने कहा था कि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है लेकिन मूल्य दबाव अभी व्यापक नहीं है। ऐसे में निकट भविष्य में मौद्रिक सख्ती की चर्चा जल्दबाजी होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति में संभावित तेजी प्रतिकूल आधार प्रभाव के कारण वास्तविक मूल्य दबाव को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा सकती है। साथ ही, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) अल नीनो और भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से जुड़े जोखिमों पर करीबी नजर रखेगी। बार्कलेज ने आगाह किया कि यदि अगस्त में वर्षा में उल्लेखनीय सुधार नहीं होता है तो खरीफ उत्पादन पर जोखिम और बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तेल की ऊंची कीमतों के कारण पिछले सप्ताह वित्तीय स्थितियां फिर सख्त हुई हैं और यह जून की मौद्रिक नीति समीक्षा के समय के स्तर पर लौट आई हैं जिससे आरबीआई के जून के उपायों का असर कुछ कम हुआ है। हालांकि, विदेशी पूंजी प्रवाह में सुधार को देखते हुए बार्कलेज का मानना है कि आगामी बैठक में मौद्रिक नीति समिति ब्याज दरों को स्थिर रखेगी।