By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 21, 2026
महंगाई बढ़ने और कई वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ने के संकेतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने इस महीने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करने का सर्वसम्मति से फैसला किया था। बुधवार को जारी एमपीसी की बैठक के ब्योरे में यह बात कही गई। तीन दिन चली बैठक में एमपीसी ने करीब चार साल में पहली बार प्रमुख नीतिगत दर रेपो को बढ़ाने का फैसला किया था।
आरबीआई ने सात अक्टूबर को हुई तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के बाद रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी थी। गवर्नर समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने दर बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया था। बैठक के ब्योरे के अनुसार, मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई का दबाव अब अधिक व्यापक होता दिख रहा है।
अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की में शामिल 37 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई दर चार प्रतिशत से अधिक थी, जबकि मार्च में यह अनुपात केवल 20 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला कितने समय तक चलेगा और दरें कितनी बढ़ाई जाएंगी, यह आर्थिक वृद्धि और महंगाई की वास्तविक स्थिति तथा उनके भविष्य के परिदृश्य पर निर्भर करेगा। इसमें विशेष रूप से अंतर्निहित महंगाई, कीमतों के दबाव का व्यापक होना, आपूर्ति संबंधी झटकों के दूसरे दौर के प्रभाव और मांग में बदलाव की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
एमपीसी की सदस्य और आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि महंगाई मुख्य रूप से बाहरी आपूर्ति संबंधी झटकों के कारण बढ़ रही है। फिलहाल इसके लंबे समय तक बने रहने या महंगाई को लेकर लोगों की उम्मीदों को प्रभावित करने के बहुत कम संकेत हैं। उन्होंने कहा कि महामारी के बाद महंगाई को निर्धारित दायरे में रखने की व्यवस्था के दौरान जब भी महंगाई दर संतोषजनक सीमा के निचले या ऊपरी स्तर तक पहुंची अथवा उसे पार किया, आरबीआई ने उचित नीतिगत कदम उठाए।
मौद्रिक नीति की जिम्मेदारी संभालने वाली गुप्ता ने कहा, इससे नीतिगत ढांचे की विश्वसनीयता बनी रही और महंगाई को लेकर लोगों की उम्मीदें लक्ष्य के अनुरूप रहीं। इसलिए बढ़ती महंगाई और आर्थिक वृद्धि की मजबूती को देखते हुए मेरा मानना है कि अब और इंतजार करने के बजाय इस बैठक में रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ानी चाहिए।