गिरते Rupee को बचाने के लिए RBI का बड़ा एक्शन, Banks की Forex Position पर लगाई सख्त लिमिट

By Ankit Jaiswal | Mar 30, 2026

रुपये में लगातार गिरावट और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत ने एक सख्त कदम उठाया है, जिसे पिछले एक दशक में सबसे अहम कदमों में से एक माना जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में खुली पोजीशन की सीमा तय कर दी है, जिससे रुपये के खिलाफ बड़े सट्टा दांव पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है।

मौजूद जानकारी के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बाद से रुपये पर दबाव लगातार बढ़ा है और यह रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है। इसके चलते केंद्रीय बैंक अब केवल डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करने के बजाय सीधे बाजार के ढांचे को नियंत्रित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

बताया जा रहा है कि मार्च के पहले तीन हफ्तों में ही विदेशी मुद्रा भंडार में 30 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई है, जो इस बात का संकेत है कि केवल पारंपरिक उपाय अब पर्याप्त नहीं रह गए हैं। इसी वजह से नीति निर्माताओं ने बैंकों की जोखिम क्षमता पर सीधा नियंत्रण लगाने का फैसला लिया है।

इस फैसले का असर बाजार पर तुरंत देखने को मिला, जहां रुपये में मजबूती आई और यह डॉलर के मुकाबले तेजी से उभरा। हालांकि बैंकिंग शेयरों पर दबाव देखने को मिला, क्योंकि बैंकों को अपनी पोजीशन तेजी से कम करनी पड़ सकती है।

गौरतलब है कि भारत में रुपये की कीमत केवल घरेलू बाजार से तय नहीं होती, बल्कि सिंगापुर, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक केंद्रों में भी इसका प्रभाव पड़ता है। यहां डेरिवेटिव सौदों के जरिए बड़े स्तर पर सट्टा गतिविधियां होती हैं, जिससे घरेलू बाजार प्रभावित होता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार इसी चुनौती को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने विदेशों में होने वाले रुपये से जुड़े सौदों की निगरानी बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा है, ताकि यह समझा जा सके कि बाजार में दबाव कहां से बन रहा है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने कुछ आपत्तियां भी जताई हैं।

जानकारों का मानना है कि यह कदम अल्पकालिक राहत दे सकता है, लेकिन लंबे समय में रुपये की दिशा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, तेल की कीमतों और पूंजी प्रवाह पर निर्भर करेगी।

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