By Ankit Jaiswal | Apr 06, 2026
इस हफ्ते होने वाली मौद्रिक नीति बैठक को लेकर बाजार में काफी हलचल है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने वाला है। बता दें कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते बने हालात का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है, जिससे नीति निर्माताओं के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
बताया जा रहा है कि ईरान से जुड़े युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे महंगाई और आर्थिक विकास दोनों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह ऊर्जा संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर आर्थिक वृद्धि पर ज्यादा पड़ सकता है।
वहीं दूसरी ओर, वित्तीय बाजारों में भी अस्थिरता देखने को मिल रही है। रुपये में कमजोरी आई है और यह डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास पहुंच गया है। साथ ही सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी बढ़ी है, जो निवेशकों की चिंता को दिखाती है।
ऐसे में माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक का फोकस दरों में बदलाव करने की बजाय बाजार को स्थिर रखने पर रहेगा। इसमें तरलता बढ़ाना, बॉन्ड खरीदना और विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
गौरतलब है कि कुछ बाजार संकेत यह भी दिखा रहे हैं कि निवेशक आगे चलकर दरों में बढ़ोतरी की संभावना देख रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा तभी होगा जब महंगाई लगातार लक्ष्य से ऊपर बनी रहती है।
मौजूद अनुमानों के अनुसार, आने वाले वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर थोड़ी धीमी हो सकती है, जबकि महंगाई में बढ़ोतरी का जोखिम बना रहेगा। ऐसे में केंद्रीय बैंक संतुलित रुख अपनाते हुए न तो ज्यादा सख्ती करेगा और न ही ज्यादा ढील देगा।