जिन कैदियों की अपील दाखिल नहीं हुई, उनके रिकॉर्ड अदालत में पेश किए जाएं : Uttarakhand High Court

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 01, 2026

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि जेलों में सजा काट रहे उन कैदियों का रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, जिनकी अभी तक अपील नहीं दायर हुई है।

मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निरीक्षण करने और उन कैदियों की संख्या की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जिनकी अपीलें अभी तक उच्च न्यायालय में दायर नहीं की गई हैं ताकि ऐसे कैदियों को वकील उपलब्ध कराए जा सकें और उन्हें सहायता प्रदान की जा सके।

इस संबंध में एक वकील ने न्यायालय को सूचित किया कि जेल में बंद कैदियों को आवश्यकतानुसार कानूनी सेवाएं प्रदान करना विधिक सेवा प्राधिकरण, जेल महानिरीक्षक और जेल अधीक्षकों की जिम्मेदारी है ताकि जिन लोगों की अपीलें अभी तक दायर नहीं की गई हैं, उनकी अपीलें दायर की जा सकें।

एक अन्य मामले में एक अपील 1,299 दिनों की देरी से दायर की गयी थी। मामले का संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने पूछा था कि ऐसी देरी क्यों होती है। तब यह पता चला कि जेल में आने वाले लोगों और वकीलों द्वारा जिस प्रारूप में कैदियों से अपील की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी जाती है, उसमें यह दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है कि क्या कोई अपील दायर नहीं की गई है और यदि नहीं की गयी है तो इसका कारण क्या है जैसे कि क्या कैदी को निजी वकील की आवश्यकता है या वह अपील दायर नहीं करना चाहता है।

इस संबंध में अब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी संबंधित लोगों को एक संशोधित प्रारूप जारी किया है। इसके बाद, जेल अधिकारी प्रत्येक कैदी की स्थिति के बारे में जानकारी देंगे कि उसकी अपील दायर की गई है या नहीं। इसके आधार पर विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करेगा या अपील दायर करने में उनकी मदद करेगा।

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