चुनावी राज्यों में 245 करोड़ रुपये से ज्यादा मादक पदार्थों की बरामदगी चिंता का विषय

By संतोष पाठक | Nov 21, 2023

चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर यह एलान किया है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम- इन पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद से इन चुनावी राज्यों में 1760 करोड़ रुपये से अधिक की कैश रकम, शराब, मादक पदार्थ और अन्य कीमती सामान पकड़ा गया है। इस बात में किसी को कोई शक कतई नहीं होगा कि इस भारी-भरकम कैश, शराब, मादक पदार्थों और कीमती वस्तुओं का इस्तेमाल चुनाव में मतदाताओं को लुभाकर वोट हासिल करने के लिए ही किया जाना था। चुनाव आयोग द्वारा दिया गया बरामदगी का विस्तृत डेटा चौंकाने से ज्यादा चिंता पैदा करता है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 2018 के राज्य विधानसभा चुनावों की तुलना में इस बार चुनावी राज्यों में बरामदगी में सात गुना से ज्यादा की वृद्धि दर्ज हुई है और चुनाव के आखिर तक अभी इसमें और ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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लेकिन सबसे ज्यादा चिंताजनक बात इन राज्यों से बरामद किए गए ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का आंकड़ा हैं। चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए ड्रग्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, यह अपने आप में भारतीय लोकतंत्र, चुनाव लड़ रहे राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों पर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस बार के विधानसभा चुनाव में अब तक सबसे ज्यादा 103.74 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ तेलंगाना में जब्त की गई है। दूसरे नंबर पर राजस्थान है जहां से 91.71 करोड़ रुपये की कीमत के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। मादक पदार्थों की जब्ती के मामले में तीसरे नंबर पर मिजोरम है जो क्षेत्रफल के आधार पर पांचों चुनावी राज्यों में सबसे छोटा राज्य है। मिजोरम में 29.82 करोड़ रुपये की कीमत का मादक पदार्थ जब्त किया गया है। मध्य प्रदेश में 15.53 करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ में 4.55 करोड़ रुपये की कीमत का मादक पदार्थ जब्त किया गया है।

पांचों चुनावी राज्यों में कुल मिलाकर 214.8 करोड़ रुपये की शराब जब्त की गई है जबकि इससे ज्यादा 245.3 करोड़ रुपये के मादक पदार्थों की जब्ती की गई है। यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि, यह वह आंकड़ा है जो चुनाव आयोग के अधिकारियों और टीम ने जब्त किया है और यह माना जाता है कि इससे कई गुना ज्यादा निश्चित तौर पर बंटा होगा। यानी यह समस्या बहुत विकराल है। ऐसे में किसी न किसी को तो पहल कर इसपर रोक लगाने के लिए आगे बढ़ना ही होगा। तमाम राजनीतिक दलों को भी मिल-बैठकर यह तो सोचना ही चाहिए कि आखिर मतदाताओं को लुभाने की कोई तो सीमा होनी चाहिए क्योंकि चुनाव में वोटरों को लुभाने कर लिए शराब के साथ-साथ ड्रग्स तक का इस्तेमाल किया जा रहा हो, इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ और हो नहीं सकता। अगर राजनीतिक दल स्वेच्छा से इस पर कदम आगे नहीं बढ़ाते हैं तो फिर चुनाव आयोग को खुद से आगे बढ़कर इस पर कदम उठाना चाहिए या फिर सुप्रीम कोर्ट को इसका स्वतः संज्ञान लेकर सबको नोटिस जारी कर, सुनवाई करने के बाद कठोर नियम या कानून बनाना चाहिए।

-संतोष पाठक

लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।

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