By रेनू तिवारी | Jan 22, 2026
उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2000 में हुए ऐतिहासिक लाल किला हमले के दोषी और मौत की सजा पाए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक की उपचारात्मक याचिका (Curative Petition) पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। बृहस्पतिवार को अदालत ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए आरिफ के पास उपलब्ध अंतिम कानूनी विकल्प पर विचार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
लाल किला मामले में आतंकवादी की मौत की सजा के खिलाफ याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस
इस हमले में सेना के तीन जवान शहीद हो गए थे। न्यायालय ने इस मामले में सजा के खिलाफ आरिफ की पुनर्विचार याचिका तीन नवंबर 2022 को खारिज कर दी थी। आरिफ उर्फ अशफाक को अक्टूबर 2005 में निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी और दिल्ली उच्च न्यायालय ने सितंबर 2007 में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था।
इसके बाद आरिफ ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने अगस्त 2011 में आरिफ को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा था। बृहस्पतिवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की विशेष पीठ ने वकीलों द्वारा प्रस्तुत दलीलों पर गौर किया, जिसमें शीर्ष अदालत के उन फैसलों का हवाला दिया गया था, जिनमें अपील और पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए मृत्युदंड को बरकरार रखा गया था। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ नोटिस जारी करें।’’
उपचारात्मक याचिका वादी के पास फैसले को चुनौती देने के लिए उपलब्ध अंतिम कानूनी उपाय है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं दो बार अपील और समीक्षा याचिका को खारिज करके बरकरार रखा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 दिसंबर 2000 की रात को कुछ घुसपैठिए लाल किले के अंदर उस क्षेत्र में घुस गए जहां भारतीय सेना की 7 राजपूताना राइफल्स की यूनिट तैनात थी और उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। इस घटना में सेना के तीन जवान शहीद हो गए थे।
मोहम्मद आरिफ को सजा दिलाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया पिछले दो दशकों से अधिक समय से चल रही है:
अक्टूबर 2005: निचली अदालत ने आरिफ को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई।
सितंबर 2007: दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले और फांसी की सजा को बरकरार रखा।
अगस्त 2011: उच्चतम न्यायालय ने भी निचली अदालत और हाई कोर्ट के फैसले को सही माना।
3 नवंबर 2022: सुप्रीम कोर्ट ने आरिफ की पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया था।
उपचारात्मक याचिका किसी भी वादी के पास उपलब्ध अंतिम कानूनी उपाय है। यह तब दायर की जाती है जब मुख्य याचिका और पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दोनों खारिज हो चुकी हों। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि न्याय की प्रक्रिया में कोई बड़ी चूक न रह जाए।